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छह माह से अधूरा पड़ा मसौढ़ी का ऐतिहासिक गांधी मैदान
धीमी रफ्तार से नाराज़ खिलाड़ी और मॉर्निंग वॉकर
नगर परिषद की सुस्त कार्यशैली पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने जल्द निर्माण पूरा करने की उठाई मांग
मसौढ़ी नगर का ऐतिहासिक गांधी मैदान पिछले लगभग छह से सात महीनों से निर्माणाधीन है, लेकिन अब तक केवल मिट्टी भराई का कार्य ही पूरा हो सका है। निर्माण कार्य की धीमी गति से स्थानीय लोगों, खिलाड़ियों, युवाओं, बच्चों और मॉर्निंग वॉक करने वाले बुजुर्गों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
गांधी मैदान मसौढ़ी शहर का एकमात्र बड़ा सार्वजनिक मैदान है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग सुबह-शाम टहलने, व्यायाम करने और विभिन्न खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने पहुंचते हैं। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से इन सभी गतिविधियों पर लगभग विराम लग गया है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छह-सात महीने बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी है। उनका कहना है कि यदि कार्य तेजी से किया जाता, तो अब तक मैदान तैयार हो चुका होता। लोगों ने नगर परिषद से निर्माण कार्य में तेजी लाकर जल्द से जल्द मैदान को आम जनता के लिए खोलने की मांग की है। नगर परिषद की ओर से बताया गया कि (बरसाती) प्रवाह और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है, जिसके चलते काम अपेक्षित गति से नहीं हो सका।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य को जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।स्थानीय नागरिकों ने कहा कि गांधी मैदान केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि शहर के लोगों के स्वास्थ्य, सामाजिक गतिविधियों और सांस्कृतिक आयोजनों का भी प्रमुख केंद्र है। ऐसे में निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी से हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से निर्धारित समय सीमा तय कर निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।


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