अदालत का फैसला दुष्कर्म के दोषी बबुन्दर को 10 वर्ष का सश्रम कारावास
- 25 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद
- करीब 7 वर्ष पूर्व महिला को शादी का झांसा देकर जबरन दुष्कर्म किए जाने का मामला
राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-
करीब 7 वर्ष पूर्व महिला को शादी का झांसा देकर जबरन दुष्कर्म किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू , सोनभद्र बिपिन कुमार तृतीय की अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी बबुन्दर को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। उसके ऊपर 25 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक घोरावल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने 17 अक्तूबर 2019 को कोर्ट में 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दिए प्रार्थना पत्र में अवगत कराया था कि उसके पति वर्ष 2006 से नासिक महाराष्ट्र में कार्य करते हैं। समय समय पर वे घर आते हैं और उसके खाते में पैसा भेजते रहते हैं।
इसकी जानकारी होने पर घोरावल थाना क्षेत्र के परसौना गांव निवासी बबुन्दर पुत्र जोखन अपने साथी के साथ उसके घर आया और 10 हजार रुपये कर्ज की मांग करने लगा। जब पैसा न होने की बात कही गई उसके बावजूद बबुन्दर अक्सर उसके घर आने लगा और शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरन सम्बंध बनाने लगा। करीब 6 माह तक ब्लैकमेल कर सम्बंध बनाता रहा। इतना ही नहीं उसे ब्लैकमेल कर डरा धमकाकर 10 हजार रुपये भी ले लिया। मोबाईल पर उसे अश्लील मैसेज भेजने लगा और बातचीत भी करता था।
पति के भेजे एक लाख रुपये भी ले लिया। इतना भयभीत कर दिया था कि अपने पति से भी कुछ नहीं बता सकी। इसकी सूचना उम्भा चौकी और घोरावल थाने में दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब पति घर आए तो सारी बात बताई। कोर्ट के आदेश पर घोरावल कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने बबुन्दर के विरुद्ध कोर्ट में दुष्कर्म, जान मारने की धमकी, अमानत में खयानत व आपराधिक षडयंत्र में चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दुष्कर्म के दोषी बबुन्दर को 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।


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