सावन की अंतिम सोमवारी पर पाकुड़िया से रघुनाथगंज रवाना हुई कांवरियों की टोली

विगत कई वर्षों से जारी है कांवर यात्रा

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पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- सनातनी मान्य परंपराओं में श्रावण महीने की विशिष्टता और महिमा चिरकाल से रही है। सनातन सांस्कृतिक मूल्यों में सृष्टि काल से ही आध्यात्मिक महत्ता रही है। कहा जाता है कि धर्म अर्थात कर्तव्य एवं आध्यात्म ही सनातन के मूल तत्व हैं। सनातन धर्म और संस्कृति में सभी महीनों की अपनी विशिष्टता रही है। श्रावण से लेकर देवउठावनी एकादशी तक के चार महीनों को श्रद्धालु आध्यात्मिक जागरण की वेला भी कहते हैं।
 
बताया जाता है कि देवताओं और दानवों ने संयुक्त रूप से समुद्र मंथन किया था। इससे लक्ष्मी सहित कुल 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी, जिसमें कालकूट विष भी था। विष के कुप्रभाव को रोकने के लिए देवों के देव महादेव ने अपने कंठ में विष धारण कर संकट का निवारण किया और नीलकंठ कहलाए। विषपान कर भगवान शिव ने विश्व का कल्याण किया। इसी निमित्त महादेव के प्रति जलार्पण कर भक्त अपनी कृतज्ञता समर्पित करते रहे हैं।
 
अंतिम सोमवारी 24 अगस्त को भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने के लिए 21 अगस्त की शाम चार बजे कांवरियों की टोली बस से बंगाल के रघुनाथगंज के लिए रवाना हुई। इसमें युवा, वयस्क, किशोर और महिलाएं भी शामिल हैं। प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से संथाल साफाहोड़ समाज की 21 श्रद्धालु महिलाएं भी कांवर यात्रा में शामिल होकर गंगाजल भरने के लिए रघुनाथगंज गई हैं।
 
22 अगस्त शनिवार को कांवरिये बंगाल के रघुनाथगंज में गंगा स्नान के बाद गंगाजल लेकर बोल बम के जयघोष के साथ नंगे पांव वहां से प्रस्थान करेंगे। शाम को गड़वाड़ी विद्यालय में शुद्ध भोजन करने के बाद रात्रि विश्राम विद्यालय परिसर में होगा। इसके बाद नदी में स्नान कर कांवर लेकर महेशपुर शिव मंदिर पहुंचेंगे और भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद पुनः नंगे पांव पाकुड़िया के लिए प्रस्थान करेंगे।
 
इस दौरान रास्ते में शुद्ध भोजन की व्यवस्था रहेगी। भोजन के बाद पुनः स्नान कर कांवर लेकर 23 अगस्त को पाकुड़िया के राम-सीता मंदिर पहुंचेंगे। वहां भोजन के बाद रात्रि विश्राम होगा। अंतिम सोमवार 24 अगस्त को नदी में स्नान कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलार्पण के उपरांत कांवर यात्रा का विधिवत समापन होगा।
 
कांवर यात्रियों की सदियों से सुखद कांवर यात्रा होती रही है। इन दिनों कांवरियों की संख्या भी बढ़ती देखी जा रही है। कांवरियों को भक्तों का पूरा सहयोग मिलता रहा है। जगह-जगह जलपान, ठंडे पेय और शुद्ध भोजन की व्यवस्था की जाती है।
 
आयोजित कांवर यात्रा में प्रखंड के कई ग्रामीण इलाकों से कांवरिये शामिल होकर श्रद्धा-भाव से भगवान शिव और माता पार्वती को गंगाजल अर्पित करते हैं। सदियों से आयोजित यह कांवर यात्रा भगवान शिव को गंगाजल अर्पण और पूजन के साथ सामाजिक समरसता का प्रतीक भी बनी हुई है।
 
कांवरिया टोली के व्यवस्थापक पप्पू गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष कुल 250 कांवरिये कांवर यात्रा में शामिल हैं। इनमें महिलाएं तथा बालक-बालिकाएं भी शामिल हैं। पांच बड़ी बसों के अलावा छोटे वाहन भी चल रहे हैं। पाकुड़िया से वाहनों द्वारा कांवरिये रवाना हुए हैं। शनिवार को गंगाजल लेकर सभी कांवरिये नंगे पांव एक साथ जलार्पण के लिए रविवार की शाम पाकुड़िया पहुंचेंगे तथा 24 अगस्त को भगवान शिव और आदि माता पार्वती को जलार्पण एवं पूजन करेंगे।

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