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जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार की शिकायत पर हुआ स्थानांतरण; फिर भी पड़री गोदाम पर कुर्सियां नहीं छोड़ रहीं विपणन निरीक्षक दीपिका बरनवाल
मीरजापुर।
मिर्जापुर । जनपद के पड़री स्थित धान/गेहूं क्रय एवं विपणन केंद्र पर तैनात विपणन निरीक्षक दीपिका बरनवाल की कार्यप्रणाली एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार द्वारा की गई गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शासन स्तर से उनका स्थानांतरण तो कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद वह नियम-कानून को ताक पर रखकर क्रय केंद्र पर धड़ल्ले से जमी हुई हैं।
आलम यह है कि स्थानांतरण आदेश जारी हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी वह कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं और अपने रसूख के बल पर ट्रांसफर को निरस्त कराने के लिए लगातार जोड़-तोड़ व पैरवी में जुटी हुई हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
भ्रष्टाचार छिपाने के हथकंडे और अनाज के भारी 'शॉर्टेज' से सुलग रहा मामला
मामले को लेकर प्रधान संघ के जिला प्रभारी रामदेव सरोज और प्रधान संघ अध्यक्ष ब्यास जी बिंद एडवोकेट ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि दीपिका बरनवाल के पूरे कार्यकाल के दौरान केंद्र पर जमकर अनियमितताएं और वित्तीय भ्रष्टाचार हुआ है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि गोदाम में रखे गए खाद्यान्न (अनाज) के स्टॉक में भारी 'शॉर्टेज' (कमी) है, जिसे छिपाने के लिए यह सारा खेल खेला जा रहा है। स्थिति यह है कि गोदाम में अनाज का सही हिसाब-किताब न होने और भारी
गड़बड़ियों की आशंका के चलते कोई भी नया अधिकारी या अन्य कर्मचारी इसका प्रभार लेने को तैयार नहीं है। विभागीय जानकारों का मानना है कि यदि इस गोदाम के स्टॉक और कागजातों की निष्पक्ष जांच करा दी जाए, तो केंद्र पर हुए बड़े प्रशासनिक घोटालों की परतें खुलकर सामने आ जाएंगी।
जनप्रतिनिधियों की दो टूक: तत्काल हो रिलीव वरना होगा आर-पार का आंदोलन
विपणन निरीक्षक की इस हठधर्मिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार, प्रधान संघ के जिला प्रभारी रामदेव सरोज और प्रधान संघ अध्यक्ष ब्यास जी बिंद एडवोकेट ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन और विपणन विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि स्थानांतरण के बाद भी सरकारी गोदाम पर अवैध रूप से काबिज दीपिका बरनवाल को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (रिलीव)
किया जाए, ताकि केंद्र पर व्याप्त अराजकता समाप्त हो सके। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस और विधिक कार्रवाई नहीं की, तो वे किसानों और क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर एक बड़ा और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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