शादी का मतलब कभी भी अपने सपनों को छोड़ना नहीं होना चाहिए। आरती बिराजदार।

शादी को जिंदगी की नई शुरुआत माना जाता है। लेकिन कई लड़कियों के लिए यह ऐसा समय भी होता है जब वे अपने सपनों को पूरा करने के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। 

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स्वतंत्र प्रभात।
 
ब्यूरो प्रयागराज।
 
दया शंकर त्रिपाठी।
 
शादी को जिंदगी की नई शुरुआत माना जाता है। लेकिन कई लड़कियों के लिए यह ऐसा समय भी होता है जब वे अपने सपनों को पूरा करने के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। 
 
सन नियो के शो थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान में इन दिनों यही कहानी दिखाई जा रही है। शो में वैदेही की शादी होने वाली है, लेकिन साथ ही वह अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। वह शादी, पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यह कहानी उन महिलाओं की हिम्मत और मेहनत को दिखाती है, जो अपनी जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी नहीं छोड़तीं।
 
इस ट्रैक के बारे में बात करते हुए वैदेही का किरदार निभा रहीं आरती बिराजदार ने कहा कि मैं यह कहानी पर्दे पर निभा रही हूं, लेकिन असल जिंदगी में भी बहुत-सी लड़कियां पढ़ाई, नौकरी, शादी और परिवार की जिम्मेदारियों को एक साथ संभालती हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को पूरा करना आसान नहीं होता, लेकिन फिर भी कई महिलाएं हर दिन यह सब करती हैं।
 
मैंने ऐसी लड़कियों की कहानियां भी सुनी हैं, जो अपनी शादी के जोड़े में ही परीक्षा देने पहुंचीं, परीक्षा खत्म की और फिर वापस अपनी शादी में शामिल हो गईं। ऐसा करने के लिए जितनी हिम्मत और लगन चाहिए, वह सच में प्रेरणा देने वाली है। ऐसी हर लड़की को मेरा दिल से सलाम, जो अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी अपने सपनों को नहीं छोड़ती। वे भले ही आम लड़कियां हों, लेकिन उनके हौसले और मेहनत उन्हें खास बनाते हैं। शादी का मतलब कभी भी अपने सपनों को छोड़ना नहीं होना चाहिए।"
 
थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान' हर सोमवार से शनिवार शाम 7:30  सन नियो पर प्रसारित होता है।
 
 

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