शिक्षा के मंदिर में 'धुआँ' और 'सन्नाटा': प्राथमिक विद्यालय पुरवा में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, विभागीय दावे फेल

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हलिया मीरजापुर।

संवाददाता प्रवीण तिवारी

मीरजापुर।सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की अलख जगाने और बच्चों को साक्षर बनाने के सरकार के करोड़ों के दावे, मीरजापुर के हलिया विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय पुरवा की दहलीज पर आकर दम तोड़ रहे हैं। एक ओर सरकार बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर यह विद्यालय पूरी तरह से 'अंधेरे' की भेंट चढ़ चुका है। यहाँ तैनात प्रधानाध्यापक  की कार्यशैली पर न केवल सवाल उठ रहे हैं, बल्कि उन पर गंभीर कदाचार के आरोप भी लगे हैं।

 निलंबन का सबक 'बेअसर'

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यह पहला मौका नहीं है जब शिक्षक विवादों के केंद्र में आए हों। जनवरी 2025 में विद्यालय में शराब के नशे में आने के आरोपों के बाद बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने उन्हें निलंबित कर कड़ा संदेश देने की कोशिश की थी। लेकिन, विभाग का यह निलंबन महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। निलंबन के बाद बहाली हुई, लेकिन शिक्षक की कार्यशैली में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक की लापरवाही के कारण विद्यालय शिक्षा का केंद्र न रहकर 'अव्यवस्था का अड्डा' बन गया है।
 *सन्नाटा पसरा, रसोईघर बंद: नामांकन का मजाक* 
विद्यालय में 20 छात्रों का नामांकन दर्ज है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। विद्यालय परिसर में बच्चों की चहकती आवाजें सुनाई देने के बजाय वहां सन्नाटा पसरा रहता है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोपहर के समय भी विद्यालय का रसोईघर बंद मिला, जो मध्याह्न भोजन योजना के क्रियान्वयन की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप होने के कारण अब अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं, जिससे सरकारी शिक्षा तंत्र के प्रति उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो रहा है।

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 परिसर में धूम्रपान का 'विषाक्त' माहौल

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ग्रामीणों के आरोप और भी गंभीर हैं। उनका दावा है कि विद्यालय परिसर का उपयोग धूम्रपान के लिए किया जा रहा है। विद्यालय की बाउंड्री वॉल के पास बड़ी संख्या में सिगरेट के खाली पैकेट और अवशेषों का मिलना यह दर्शाता है कि शिक्षा के मंदिर को किस हद तक दूषित किया जा रहा है। बच्चों के सामने इस तरह का आचरण न केवल अनैतिक है, बल्कि यह विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा तमाचा है।
 

एबीएसए हलिया की दो टूक: "लापरवाही बर्दाश्त नहीं"* 
विद्यालय में फैली इस अराजकता पर खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) हलिया ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:


"विद्यालय से संबंधित शिकायतें बेहद गंभीर हैं। पूर्व में हुई विभागीय कार्रवाई और वर्तमान में लगे आरोपों की एक साथ निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कठोरतम विभागीय कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
 *क्या इस बार होगी ठोस कार्रवाई?


प्राथमिक विद्यालय गलरिया का मामला केवल एक शिक्षक की करतूत नहीं, बल्कि विभाग की लचर निगरानी का आईना है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी केवल कागजी कार्रवाई हुई, तो गांव के गरीब बच्चों के भविष्य का क्या होगा? अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच केवल फाइल में दबेगी या फिर दोषी शिक्षक पर ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई होगी, जो अन्य शिक्षकों के लिए भी सबक बने।

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