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वर्षों बाद विंध्यधाम पहुंचीं पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल, बोलीं— "मीरजापुर ने मुझे बनाया व तराशा है, मैं आज भी उतनी ही भावुक हो जाती हूं"
विंध्याचल, मीरजापुर।
रामलाल साहनी
मीरजापुर। मीरजापुर की पूर्व जिलाधिकारी एवं वर्तमान में राजस्व विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत वर्षों बाद गुरुवार को मां विंध्यवासिनी धाम पहुंचीं। मां के दरबार में दर्शन-पूजन के दौरान वह भावुक नजर आईं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय उन्होंने परंपरानुसार पहली सीढ़ी को दाहिने हाथ से स्पर्श कर प्रणाम किया और मंत्रोच्चार व जप करते हुए मां के चरणों में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की।

Read More हरे पेड़ों की अवैध कटान से ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग व पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालदर्शन के बाद उन्होंने मां गंगा के पक्का घाट पहुंचकर अपने लगाए हुए कल्पवृक्ष को याद किया और उसको एक नजर देखकर आगे मां गंगा मैया को नमन किया और कुछ देर तक ध्यानमग्न रहीं। इस दौरान उन्हें अपने जिलाधिकारी कार्यकाल की यादें भी ताजा हो गईं। उन्होंने उस दौर को याद किया जब उनके नेतृत्व में विंध्य महोत्सव के साथ मां गंगा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ था और दीवान घाट आतिशबाजी व रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा था।

पत्रकारों से बातचीत में दिव्या मित्तल ने कहा, "मीरजापुर से जाने के बाद पहली बार यहां आने का अवसर मिला है। पहले भी यहां आकर मैं भावुक हो जाती थी और आज भी वैसा ही महसूस कर रही हूं। मां विंध्यवासिनी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है। विंध्य कॉरिडोर की परिकल्पना मेरे सामने शुरू हुई थी। आज इसका भव्य स्वरूप और आगे हुआ विकास देखकर बेहद प्रसन्नता हुई।"

उन्होंने बताया कि उनका पूरा दिन मीरजापुर में ही व्यतीत होगा तथा अगले दिन वह यहां से रवाना होंगी। वर्तमान में राजस्व विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत दिव्या मित्तल ने कहा कि मीरजापुर में प्रस्तावित नए कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण लंबे समय से लंबित है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परियोजना में जो भी बाधाएं हैं, उन्हें दूर कराने का हरसंभव प्रयास करेंगी ताकि नए कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण शीघ्र पूरा हो सके।

मीरजापुरवासियों के स्नेह पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "जितना मीरजापुर मेरा प्रशंसक है, उससे कहीं अधिक मैं मीरजापुर की प्रशंसक हूं। आज मैं जो भी हूं, मीरजापुर की वजह से हूं। इसी जनपद ने मुझे बनाया, तराशा और पहचान दी। मैं मीरजापुर की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। यहां से विदा होते समय भी मैंने कहा था कि मीरजापुर ने मेरी झोली इतनी भर दी है कि जीवनभर उसका हिसाब नहीं कर सकती।"
उन्होंने मां विंध्यवासिनी से जनपद और विंध्याचल की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि मां का आशीर्वाद सदैव मीरजापुरवासियों और यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं पर बना रहे तथा सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।
गौरतलब है कि दिव्या मित्तल के मीरजापुर से स्थानांतरण के समय उनकी विदाई ऐतिहासिक रही थी। बड़ी संख्या में लोगों ने भावुक होकर उन्हें विदा किया था और पुष्पवर्षा के बीच पूरे जनपद ने उन्हें अश्रुपूर्ण आंखों से विदाई दी थी। उनकी लोकप्रियता का वह दृश्य आज भी मीरजापुर के लोगों की स्मृतियों में जीवंत है।


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