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अयोध्या: राम मंदिर का दान और संपत्ति की खरीदारी - 'श्रद्धा के पैसे' का हिसाब
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है।
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने, सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद, गहने, चेक सब गिरता है। लेकिन अब वही 'श्रद्धा का पैसा' विवाद में है। एक तरफ ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन खरीदारी, दूसरी तरफ चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति। दान कितना आता है? विदेश से लेकर घर तक- विदेशी दान- महाकुंभ के दौरान अकेले जनवरी-फरवरी 2025 में अमेरिका समेत 6 देशों से 57 लाख रुपये का विदेशी दान मिला।
समर्पण निधि से अब तक देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने आस्था से दान दिया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह के मुताबिक ये पैसा "किसी व्यक्ति का नहीं, करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है"। शुरुआत 1 रुपये से ट्रस्ट को पहला दान मोदी सरकार ने 1 रुपये नकद देकर किया था। ट्रस्ट ने क्या खरीदा? चार महीने में 36.61 करोड़ की जमीन। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तेजी से जमीन खरीद रहा है। पिछले 4 महीने अयोध्या के हैबतपुर में 5 जगहों पर 4.29 एकड़ जमीन खरीदी गई। जिसकी कुल कीमत: 36.61 करोड़ रुपये है। सबसे बड़ी डील- 11,194 स्क्वायर फीट की एक जमीन अकेले।
रानोपाली में भी 5,490 स्क्वायर फीट की जमीन अलग से ली गई है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर विस्तार और सुविधाओं के लिए जमीन ली जा रही है। विवाद का केंद्र: चढ़ावे की 'चोरी' और करोड़ों की संपत्ति यही सबसे बड़ा मुद्दा है। आरोप है कि दानपात्रों से करोड़ों रुपये गायब हुए। 14,500 की नौकरी, करोड़ों की संपत्ति- नोट गिनने वाले 24 प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ 14,500 रुपये महीना है। लेकिन उनमें से कुछ ने 1.5 करोड़ की जमीन, 40 लाख का प्लॉट खरीद लिया। कैसे पकड़े गए- 18-20 हजार सैलरी वाले दो कर्मचारियों की डेढ़ करोड़ की जमीन खरीद से पूरा मामला खुला।
कौन शामिल- लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी दान गिनती प्रक्रिया में थे। सीसीटीवी फुटेज में पैसे चुराते पकड़े गए। कितना घोटाला? आशंका 200 करोड़ रुपये से अधिक की है। अब तक 5 कर्मचारियों से 2 करोड़ नकद, 1 कार, 3 आईफोन बरामद हुए हैं।
जांच कहां तक पहुंची? SIT और राजनीति क्या कहती है - एसआईटी का गठन - योगी सरकार ने मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय एसआईटी बनाई। 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और आठ में से सात लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है जिनके पास से काफी संपत्ति के सबूत मिले हैं। ट्रस्ट की शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ BNS की धारा 306, 316, 317, 61 के तहत केस दर्ज हुआ है। सपा का आरोप- अखिलेश यादव ने कहा कि चंदे के पैसों से मकान खरीदे गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के रिटायर जज से जांच कराने की मांग की है। ट्रस्ट का बयान- नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि ये विवाद 'जमीन खरीद विवाद' से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने एक अनुभवी CEO की नियुक्ति की जरूरत बताई।
पारदर्शिता की मांग: हिसाब कौन देगा? भाजपा नेता रजनीश सिंह ने PM को पत्र लिखकर ट्रस्ट के बनने से अब तक का पूरा वित्तीय लेन-देन वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि "हर भक्त को यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान में मिले पैसे, गहनों का इस्तेमाल कैसे हुआ"। आस्था बनाम जवाबदेही- राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था है। ट्रस्ट जमीन खरीदकर विस्तार कर रहा है, ये ठीक है। लेकिन अगर 14,500 सैलरी वाला कर्मचारी करोड़पति बन रहा है, तो सवाल उठना लाजमी है।
SIT की रिपोर्ट तय करेगी कि ये 'व्यक्तिगत गबन' है या सिस्टम की चूक। फिलहाल 8 लोग सलाखों के पीछे हैं, और करोड़ों श्रद्धालु हिसाब मांग रहे हैं।


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