कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।
महंगाई, बेरोजगारी, पर्चा लीक, सीबीएसई की गड़बडी, भारत अमेरिका व्यापार समझौता , एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं।
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज
महंगाई, बेरोजगारी, पर्चा लीक, सीबीएसई की गड़बडी, भारत अमेरिका व्यापार समझौता , एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है, उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।
राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।
राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा, इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।
भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।
इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है, उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।
Read More जनपद में सर्वाधिक रक्तदान कराने वाली विंध्य फाउंडेशन ट्रस्ट विश्व रक्तदाता दिवस पर सम्मानित।उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।
कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।
इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।
क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014, 2017, 2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।
अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है, जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।
बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी


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