भारतीय लोकतंत्र

हिंदुत्व, जाति और बंगाल का भविष्य

- महेन्द्र तिवारी     पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2026 केवल एक चुनावी वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसी निर्णायक ऐतिहासिक घटना बनकर उभरा है जिसने पूरे देश की राजनीति को नए ढंग से सोचने पर विवश कर दिया है।...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

राष्ट्रवाद का सबसे जटिल विरोधाभासी संक्रमण काल

वर्तमान समय में राष्ट्रवाद अपने सबसे जटिल, विरोधाभासी और बहुअर्थी दौर से गुजर रहा है, यह वह राष्ट्रवाद नहीं रह गया है जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान त्याग, नैतिक साहस, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का प्रतीक था, बल्कि यह...
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“परिणाम चाहे जो हों, विजय लोकतंत्र की ही होगी”

प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश     भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त उत्सव होते हैं। कल पांच राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित होने जा रहे हैं।...
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आज़ाद भारत का सर्वाधिक मतदान

देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना...
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अरविंद केजरीवाल ने किया जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट का बहिष्कार, कहा- न्याय की उम्मीद नहीं

ब्यूरो प्रयागराज। अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के...
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राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी? आप का बड़ा दावा

ब्यूरो प्रयागराज। क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा...
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दल बदल की राजनीति और जनविश्वास का प्रश्न ईमानदारी से चलने वाले दल की निरंतर उन्नति और भ्रष्टाचार में डूबे दल की अनिवार्य गिरावट

भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी बहुदलीय व्यवस्था है जहां अनेक विचारधाराएं अनेक नेतृत्व और अनेक सामाजिक आकांक्षाएं एक साथ विकसित होती हैं, परंतु पिछले कुछ वर्षों में एक अलग ही प्रवृत्ति तेजी से उभरती दिखाई दी है जिसे...
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रिकॉर्ड मतदान, बदलता भारत — लोकतंत्र अब जनता की मुट्ठी में

कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं, कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।  9 अप्रैल 2026 ऐसा ही दिन था। असम, केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़...
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सेवा का सूर्योदय, इतिहास का सूर्यास्त नहीं: मोदी ने रचा 'अमर महाकाव्य'

जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए, तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया, जो पहले...
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24 फरवरी 2002: नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्कर्ष का प्रज्वलित आरंभ

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 24 फरवरी 2002—यह तिथि केवल एक उपचुनाव की घोषणा नहीं थी, यह भारतीय लोकतंत्र के विस्तृत आकाश में उगते एक नए सूर्य का प्रथम उषाकाल था। वडनगर की साधारण पृष्ठभूमि से निकला एक अनुशासित...
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संसदीय विमर्श के नए मानक और राघव चड्ढा की तथ्यपरक राजनीति

महेन्द्र तिवारी    भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था संसद में जन सरोकारों की अभिव्यक्ति जब आंकड़ों की शुचिता और तार्किक प्रखरता के साथ होती है, तो वह केवल राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का दस्तावेज बन जाती है। हाल के...
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