भारतीय लोकतंत्र

रिकॉर्ड मतदान, बदलता भारत — लोकतंत्र अब जनता की मुट्ठी में

कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं, कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।  9 अप्रैल 2026 ऐसा ही दिन था। असम, केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

सेवा का सूर्योदय, इतिहास का सूर्यास्त नहीं: मोदी ने रचा 'अमर महाकाव्य'

जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए, तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया, जो पहले...
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24 फरवरी 2002: नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्कर्ष का प्रज्वलित आरंभ

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 24 फरवरी 2002—यह तिथि केवल एक उपचुनाव की घोषणा नहीं थी, यह भारतीय लोकतंत्र के विस्तृत आकाश में उगते एक नए सूर्य का प्रथम उषाकाल था। वडनगर की साधारण पृष्ठभूमि से निकला एक अनुशासित...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

संसदीय विमर्श के नए मानक और राघव चड्ढा की तथ्यपरक राजनीति

महेन्द्र तिवारी    भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था संसद में जन सरोकारों की अभिव्यक्ति जब आंकड़ों की शुचिता और तार्किक प्रखरता के साथ होती है, तो वह केवल राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का दस्तावेज बन जाती है। हाल के...
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