रेबीज की आशंका वाली गाय के दूध से बना चरणामृत बंटने से हड़कंप, 50 लोगों को लगा एंटी-रेबीज टीका
डाड़ी गांव में दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को बांटा गया था चरणामृत, चाय की दुकानों तक भी पहुंचा दूध;
रिपोर्टर/बृजनाथ तिवारी (ग़ोला तहसील)
गोलाबाजार, गोरखपुर।* गोला थाना क्षेत्र के डाड़ी गांव में रेबीज के लक्षणों वाली बताई जा रही गाय के दूध से बना चरणामृत श्रद्धालुओं में बांटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इसी गाय का दूध चौराहे की कुछ चाय की दुकानों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है। गाय की हालत बिगड़ने के बाद संक्रमण की आशंका से ग्रामीणों में दहशत है। एहतियातन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक करीब 50 लोगों को एंटी-रेबीज टीका लगाया है।
जानकारी के मुताबिक, डाड़ी चौराहे पर नवयुवक मंगल दल दुर्गा पूजा समिति की ओर से 11 अक्टूबर से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। पूजा समिति के अध्यक्ष सुधांशु रंजन ने बताया कि पूजा-पाठ के लिए गांव के ज्ञानेंद्र यादव के घर से गाय का दूध मंगाया जाता था। इसी दूध से चरणामृत तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता था। पूजा के दौरान डाड़ी और आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने चरणामृत ग्रहण किया था। बताया जा रहा है कि गाय का दूध चौराहे की कुछ चाय की दुकानों पर भी इस्तेमाल हुआ था।

*गाय ने खाना-पीना छोड़ा, मुंह से गिरने लगी लार
बीते रविवार, 18 अक्टूबर को गाय की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसने खाना-पीना छोड़ दिया और उसके मुंह से लार गिरने लगी। पशुपालक ने निजी पशु चिकित्सक से उपचार कराया, जहां लक्षणों के आधार पर रेबीज की आशंका जताई गई। इसके बाद राजकीय पशु चिकित्सालय, डाड़ी को सूचना दी गई। वहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. सिद्दीकी ने भी लक्षणों को देखते हुए रेबीज की आशंका व्यक्त की। गाय की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभी संक्रमण की पुष्टि स्पष्ट नहीं है।
एक सप्ताह पहले दूसरी गाय की भी हुई थी मौत
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले सुरेंद्र यादव की गाय की भी मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि उस गाय का दूध भी कुछ लोगों के घरों तक पहुंचा था। संबंधित लोगों को भी एहतियातन एंटी-रेबीज टीके लगाए गए थे। दोनों मामलों में रेबीज की पुष्टि होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
*स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया बचाव अभियान
मंगलवार को पूजा समिति अध्यक्ष सुधांशु रंजन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गोला को मामले की जानकारी दी। इसके बाद संभावित संपर्क में आए लोगों को चिह्नित कर टीकाकरण शुरू किया गया। सीएचसी गोला के चीफ फार्मासिस्ट जेके सिंह ने बताया कि अब तक करीब 50 लोगों को एंटी-रेबीज टीका लगाया जा चुका है। अन्य संबंधित लोगों को भी आवश्यकतानुसार टीके लगाए जाएंगे।
फिलहाल गांव में उन लोगों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है, जिन्होंने चरणामृत ग्रहण किया था या संबंधित गाय के दूध का सेवन किया था।संपादकीय सावधानी: खबर में रेबीज की पुष्टि नहीं होने की बात स्पष्ट रखी गई है। केवल दूध पीने या चरणामृत ग्रहण करने से रेबीज फैलने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए; संभावित संपर्क की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार चिकित्सकीय आकलन जरूरी है।


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