बरसात में शहर हुआ पानी-पानी, नगर निगम के सफाई दावों की खुली पोल
गोविन्द नगर में सड़कें बनीं दरिया, घरों-दुकानों में घुसा सीवर का गंदा पानी
कानपुर। बुधवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने शहर को पानी-पानी कर दिया। कुछ ही घंटों की बरसात में जगह-जगह हुए भीषण जलभराव ने नगर निगम के सफाई, नाला सफाई और जल निकासी व्यवस्था के दावों की एक बार फिर पोल खोलकर रख दी। कई इलाकों में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें पूरी तरह पानी में गायब नजर आईं और शहर की बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था लोगों के लिए मुसीबत बन गई।
गोविन्द नगर में जलभराव ने विकराल रूप ले लिया। ध्वस्त ड्रेनेज सिस्टम और बदहाल वर्षा जल निकासी व्यवस्था के कारण पॉपुलर धर्मकांटा से सीपीआई तथा चावला मार्केट से नंदलाल चौराहे तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क ने विशाल नदी का रूप ले लिया। कई स्थानों पर पानी इतना अधिक था कि सड़क दिखाई देना बंद हो गई। बहते पानी में नदी की तरह भंवर तक नजर आए, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए निकलना मुश्किल हो गया।
पानी में बंद हुईं गाड़ियां, धक्का लगाते दिखे लोग
जलभराव इतना भीषण था कि पानी के बीच से निकलने का प्रयास कर रहे कई दोपहिया वाहन बंद हो गए। लोगों को घुटनों तक भरे पानी में बाइक और स्कूटी को धक्का लगाकर बाहर निकालना पड़ा। सड़क और गड्ढों का अंदाजा नहीं लगने से वाहन चालक जोखिम उठाकर निकलते दिखाई दिए। कई जगह यातायात की रफ्तार थम गई और लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा।
चावला मार्केट, नंदलाल चौराहा और आसपास के आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में हालात और गंभीर रहे। बरसाती पानी के साथ सीवर का गंदा और बदबूदार पानी घरों तथा दुकानों के अंदर तक घुस गया। लोग घरों से पानी निकालने और सामान बचाने में जुटे रहे, जबकि दुकानदारों को अपना माल सुरक्षित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। गंदे पानी के कारण लोगों को परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
जलभराव की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चावला मार्केट, नंदलाल चौराहा और आसपास के कई लोगों ने अपने घरों के दरवाजों और दुकानों के शटर के सामने दो से तीन फीट ऊंची पक्की दीवारें तक खड़ी कर रखी हैं, ताकि बरसात का पानी अंदर न जा सके। लेकिन बुधवार की बारिश ने इन इंतजामों को भी बेअसर कर दिया। पानी का स्तर बढ़ने पर गंदा पानी घरों और प्रतिष्ठानों में प्रवेश कर गया।
चर्चित व्यापारी नेता प्रकाश वीर आर्य ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नगर निगम को ध्वस्त ड्रेनेज सिस्टम और जलभराव की समस्या पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। करोड़ों-अरबों रुपये विकास पर खर्च करने का क्या लाभ, जब दो-चार घंटे की बारिश में वही विकास पानी-पानी हो जाए और लोगों के घरों-दुकानों में सीवर का गंदा पानी घुसने लगे।


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