आस्था की सुरक्षा के लिए नई चुनौती

मंदिरों में बढ़ती सुरक्षा की आवश्यकता

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

राजीव शुक्ला

भारत में मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैंबल्कि करोड़ों लोगों की आस्थासंस्कृति और सामाजिक जीवन के केंद्र भी हैं। विशेष रूप से अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण और उद्घाटन के बाद देशभर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में यदि किसी मंदिर में चढ़ावे की चोरी या सुरक्षा में चूक जैसी घटना सामने आती हैतो उसका असर केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं रहताबल्कि पूरे धार्मिक तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

इसी कारण जब किसी प्रमुख मंदिर में चोरी या वित्तीय अनियमितता की घटना सामने आती हैतो प्रशासन अन्य मंदिरों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा शुरू कर देता है। इसका उद्देश्य केवल अपराधियों तक पहुँचना नहींबल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी होता है।

मंदिरों में बढ़ती सुरक्षा की आवश्यकता

राम मंदिर चढ़ावा चोरी - आस्था पर लगा दाग और सवालों के घेरे में सिस्टम Read More राम मंदिर चढ़ावा चोरी - आस्था पर लगा दाग और सवालों के घेरे में सिस्टम

देश के अनेक बड़े मंदिरों में प्रतिदिन लाखों रुपये का चढ़ावा आता है। त्योहारोंविशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यह राशि कई गुना बढ़ जाती है। नकद दान के साथ-साथ सोनाचांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ भी श्रद्धालु अर्पित करते हैं। ऐसे में इन मंदिरों की सुरक्षा किसी बैंक या अन्य महत्वपूर्ण संस्थान से कम चुनौतीपूर्ण नहीं रह जाती।

इकसठ की उम्र में तीसरा निकाह  Read More इकसठ की उम्र में तीसरा निकाह 

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग के बावजूद यदि निगरानी व्यवस्था में कहीं भी लापरवाही होतो चोरी या गबन जैसी घटनाएँ संभव हो सकती हैं। इसलिए केवल सीसीटीवी कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं हैबल्कि उनकी नियमित मॉनिटरिंगरिकॉर्डिंग की समीक्षा और सुरक्षा व्यवस्था का समय-समय पर ऑडिट भी आवश्यक है। प्रशासन की बढ़ी सतर्कता- किसी प्रमुख मंदिर में चोरी की घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन सामान्यतः अन्य प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन करते हैं। इसमें कई बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है— सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता।

सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास — कितना उचित? Read More सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास — कितना उचित?

चढ़ावे की गिनती और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया। सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और उनकी जवाबदेही। प्रवेश एवं निकास द्वारों की निगरानी। दानपात्र खोलने की पारदर्शी व्यवस्था। रिकॉर्ड रखने और डिजिटल निगरानी की प्रणाली। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत बनाए रखना होता है। तकनीक बन सकती है सबसे बड़ी सुरक्षा- आज कई प्रमुख मंदिर आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। हाई-रिजॉल्यूशन कैमरेफेस रिकग्निशनडिजिटल एक्सेस कंट्रोलबायोमेट्रिक प्रवेशअलार्म सिस्टम और कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएँ सुरक्षा को मजबूत बना रही हैं। इसके अलावा चढ़ावे की गणना में भी मशीनों और डिजिटल रिकॉर्डिंग का उपयोग बढ़ रहा है। इससे मानवीय त्रुटियों और अनियमितताओं की संभावना कम होती है तथा प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। श्रद्धालु मंदिर में दान केवल धार्मिक भावना से नहींबल्कि विश्वास के आधार पर करते हैं।

इसलिए यह आवश्यक है कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। नियमित ऑडिटसार्वजनिक वित्तीय रिपोर्टबैंकिंग प्रणाली के माध्यम से जमा और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था से लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। यदि किसी मंदिर में वित्तीय प्रबंधन पारदर्शी होतो चोरी या गबन की आशंकाएँ भी काफी हद तक कम हो जाती हैं। सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं मंदिरों की सुरक्षा केवल प्रशासन या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। मंदिर ट्रस्टकर्मचारीस्वयंसेवक और श्रद्धालु भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना देनासुरक्षा नियमों का पालन करना और निगरानी व्यवस्था में सहयोग करना सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी एक घटना के आधार पर सभी मंदिरों की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं होगा।

देश के अधिकांश मंदिरों में सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्थाएँ प्रभावी ढंग से संचालित होती हैं। फिर भी किसी भी घटना से सीख लेकर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाना प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक कदम है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बड़े मंदिरों के लिए एक समान सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया जाए। समय-समय पर सुरक्षा ऑडिटकर्मचारियों का सत्यापनडिजिटल लेखा-जोखाकृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और नियमित प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएँ भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना को कम कर सकती हैं।

मंदिरों की सुरक्षा केवल संपत्ति की रक्षा का विषय नहीं हैबल्कि करोड़ों लोगों की आस्था की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यदि किसी प्रमुख मंदिर में चोरी की घटना सामने आती हैतो उससे सबक लेते हुए अन्य मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण एक स्वाभाविक तथा आवश्यक प्रशासनिक कदम है। पारदर्शिताआधुनिक तकनीकजवाबदेही और जनसहभागिता के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि श्रद्धालुओं का विश्वास अटूट बना रहे और मंदिर सुरक्षितव्यवस्थित तथा विश्वसनीय धार्मिक केंद्र बने रहें।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें