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ग्रामीण पत्रकारों की सशक्त आवाज बना 'ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन', जिलाध्यक्ष अजय कुमार ओझा के नेतृत्व में बदली कार्यशैली
मीरजापुर।
संवाददाता प्रवीण तिवारी
मीरजापुर।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया जगत में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में काम करने वाले पत्रकारों को अक्सर जमीनी स्तर पर कई तरह की चुनौतियों और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में मीरजापुर जनपद के भीतर 'ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन' (ग्रापाए) ने पत्रकारों के हितों की रक्षा और उनके सम्मान को बहाल करने में एक नई मिसाल पेश की है। संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कुमार ओझा के कुशल व जुझारू नेतृत्व में आज यह एसोसिएशन जिले से लेकर प्रदेश की राजधानी तक अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है।
छात्र राजनीति से ही रहा है जुझारूपन का सफर
अजय कुमार ओझा के नेतृत्व की इस दृढ़ता और संघर्षशीलता के पीछे उनकी मजबूत पृष्ठभूमि है। स्थानीय जानकारों और उनके सहयोगियों के अनुसार, उनके भीतर का यह जुझारूपन और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखने का जज्बा छात्र राजनीति के दिनों से ही रहा है। छात्र जीवन में ही उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करना और जनहित के मुद्दों के लिए लड़ना सीख लिया था, जिसका सीधा लाभ आज मीरजापुर के पत्रकार संगठन और उससे जुड़े सदस्यों को मिल रहा है। यही कारण है कि वे हर पत्रकार की लड़ाई को अपनी व्यक्तिगत लड़ाई मानकर पूरी शिद्दत के साथ लड़ते हैं।
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जब न्याय के लिए आधी रात को भी थानों में डट जाता है संगठन
एसोसिएशन की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह समय या परिस्थिति देखकर काम नहीं करता। यदि किसी पत्रकार साथी के साथ अन्याय या अभद्रता की बात सामने आती है, तो जिलाध्यक्ष अजय कुमार ओझा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी आधी रात को भी थानों के भीतर धरने पर बैठने से पीछे नहीं हटते।
वे स्थानीय स्तर पर किसी भी दबाव में आए बिना, सीधे पुलिस के उच्चाधिकारियों (जैसे पुलिस अधीक्षक या अन्य वरिष्ठ अधिकारी) से संपर्क साधते हैं। वे अधिकारियों को जमीनी वस्तुस्थिति से
अवगत कराते हुए पूरी तार्किकता और सबूतों के साथ न्याय की मांग करते हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक अमले में भी इस संगठन की बात को बेहद गंभीरता से सुना और परखा जाता है।
फर्जी मुकदमों के खिलाफ संगठन की बड़ी कामयाबी
हाल के वर्षों में मीरजापुर के पत्रकारिता इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है जब कोई संगठन ग्रामीण पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ इतनी मजबूती से खड़ा हुआ है।
कानूनी मोर्चे पर राहत: जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में फील्ड पर काम करने वाले पत्रकारों के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज किए गए लगभग आधा दर्जन (6) मामलों को संगठन ने पूरी संजीदगी से उठाया।
निष्पक्ष जांच का दबाव: संगठन के पुरजोर विरोध और अकाट्य तथ्यों के सामने आने के बाद, पुलिस प्रशासन को इन फर्जी मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाने पर मजबूर होना पड़ा।
दोषियों पर कार्रवाई: बात सिर्फ मुकदमों की समाप्ति तक ही सीमित नहीं रही; जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन ने दबाव बनाकर उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जिन्होंने द्वेषवश या बिना जांच के पत्रकारों पर फर्जी मामले दर्ज किए थे।
संकट में मददगार: राजगढ़ के दिवंगत पत्रकार साथी के परिवार को दिलाया संबल
यह संगठन केवल अधिकारों की लड़ाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपने साथियों के सुख-दुख में एक परिवार की तरह खड़ा रहता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब राजगढ़ के एक पत्रकार साथी की सड़क दुर्घटना में असमय मृत्यु हो गई।
इस दुखद घड़ी में दिवंगत पत्रकार के परिवार को आर्थिक और मानसिक संबल देने के लिए जिलाध्यक्ष अजय कुमार ओझा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने जिला स्तरीय प्रेस स्थाई समिति की बैठक में इस मुद्दे को बेहद संजीदगी से उठाया और समिति से बकायदा प्रस्ताव पारित कराकर पीड़ित परिवार को ₹5 लाख की सरकारी आर्थिक सहायता मंजूर कराई। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता से और संगठन के अन्य साथियों को भी प्रेरित कर अपनी ओर से भी विशेष आर्थिक सहयोग जुटाकर पीड़ित परिवार के हाथों में सौंपने का अनुकरणीय कार्य किया।
एक नजर में संगठन की ताकत और संवेदनशीलता:
24x7 सक्रियता: पत्रकारों के उत्पीड़न की सूचना पर आधी रात को भी थानों में डट जाने का हौसला।
उच्च स्तरीय संवाद: स्थानीय पुलिसिया दबाव को दरकिनार कर सीधे उच्चाधिकारियों के समक्ष वस्तुस्थिति रखना।
अखंडता: बिना किसी व्यक्तिगत लाभ या भेदभाव के हर छोटे-बड़े पत्रकार के मान-सम्मान की रक्षा।
सामाजिक दायित्व: संकटग्रस्त या दिवंगत पत्रकार साथियों के परिवारों के लिए लाखों रुपये का आर्थिक सहयोग सुनिश्चित कराना।
किसी भी संगठन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संकट के समय उसका नेतृत्व कितना सजग, निडर और संवेदनशील है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन मीरजापुर और उसके जिलाध्यक्ष अजय कुमार ओझा ने केवल बयानबाजी न करके धरातल पर परिणाम दिए हैं।
पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मुकदमों में पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर करना, दोषी कर्मियों पर कार्रवाई कराना और संकट में घिरे परिवारों के लिए सरकारी व निजी स्तर पर आर्थिक सहायता का प्रबंध करना संगठन की एकजुटता, संवेदनशीलता और प्रशासनिक पकड़ को दर्शाता है। आज यह संगठन मीरजापुर में निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए एक सुरक्षित कवच और मजबूत संबल साबित हो रहा है।


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