परशुराम-लक्ष्मण संवाद और श्रीराम-जानकी विवाह का  मंचन

मानस रामलीला समिति के मंच पर गुरुवार, को परशुराम-लक्ष्मण संवाद से लेकर भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह तक की लीला का भव्य मंचन किया गया।

Abhinav Shukla Picture
Published On

स्वतंत्र प्रभात 
 
नैनी, प्रयागराज।
 
मानस रामलीला समिति के मंच पर गुरुवार, को परशुराम-लक्ष्मण संवाद से लेकर भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह तक की लीला का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के प्रसंगों को मंच पर उतारकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला के प्रसंग के अनुसार, जब भगवान परशुराम को ज्ञात हुआ कि राजा जनक के पास धरोहर के रूप में रखा भगवान शिव का धनुष टूट गया है, तो वे क्रोधित होकर जनकपुर पहुंच गए। भगवान परशुराम के उग्र रूप को देखकर वहां उपस्थित राजा भयभीत हो गए और सभी ने अपने-अपने परिचय के साथ उन्हें प्रणाम किया।
 
 
 
इसके बाद राजा जनक ने गुरु विश्वामित्र के समक्ष अपनी बात रखी और आगे की स्थिति के संबंध में मार्गदर्शन मांगा। गुरु विश्वामित्र ने उन्हें कुल-परंपरा और धर्मसम्मत आचरण के अनुसार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। रामलीला में परशुराम-लक्ष्मण संवाद के माध्यम से धर्म, मर्यादा और वीरता का सुंदर चित्रण किया गया। इसके पश्चात भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह का मनोहारी मंचन हुआ, जिसे देखकर दर्शक आनंदित हो उठे।
 
।इस अवसर पर मानस रामलीला समिति के अध्यक्ष धीरेंद्र यादव धीरू, महामंत्री नयन कुमार कुशवाहा, संरक्षक शिवशंकर दीक्षित, राकेश श्रीवास्तव, सुभाष प्रधान, अर्पित तिवारी, उपकोषाध्यक्ष राजकुमार कुशवाहा तथा मंत्री विनोद जैकब, रवि यादव, मुकेश श्रीवास्तव, राजेश थापा, पवन पांडेय, करन हांडा, दीना भैया, रवि मिश्रा सहित समिति के अन्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
 
 
 

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें