कागजों में फेल स्कूल बसें, सड़क पर बच्चों की सुरक्षा का बड़ा सवाल
एआरटीओ प्रशासन की कार्रवाई में श्री साईं एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स कॉलेज की तीन बसें जब्त, फिटनेस-परमिट-बीमा फेल मिलने पर हुई कार्रवाई
गोण्डा। शासन के निर्देश पर विद्यालयों में संचालित वाहनों की सुरक्षा और वैध अभिलेखों की जांच को लेकर परिवहन विभाग का अभियान तेज हो गया है। सोमवार को एआरटीओ प्रशासन आर.सी. भारतीय के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने विभिन्न विद्यालय वाहनों की जांच की। जांच के दौरान श्री साईं एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स कॉलेज, कर्नलगंज की तीन स्कूल बसें निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरीं। तीनों वाहनों की फिटनेस, परमिट और इंश्योरेंस फेल पाए जाने पर परिवहन विभाग ने उन्हें जब्त कर लिया।
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से विद्यालय संचालकों और स्कूल वाहन स्वामियों में हड़कंप मच गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि बच्चों के आवागमन में प्रयुक्त किसी भी वाहन के दस्तावेजों में कमी अथवा सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एआरटीओ प्रशासन ने विद्यालय प्रबंधन और वाहन स्वामियों से अपील की है कि प्रत्येक स्कूल बस अथवा वैन का फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, बीमा समेत सभी आवश्यक अभिलेख अद्यतन रखें। साथ ही वाहनों की नियमित तकनीकी जांच कराकर बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में विद्यालय वाहनों की जांच लगातार जारी रहेगी। जांच के दौरान फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस अथवा अन्य अनिवार्य अभिलेखों में कमी मिलने पर संबंधित वाहन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन कार्रवाई के साथ उठे कई बड़े सवाल
तीन बसों की जब्ती के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या स्कूल वाहनों की जांच केवल फिटनेस, परमिट और इंश्योरेंस तक सीमित रहनी चाहिए? बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन की निर्धारित क्षमता और उसमें वास्तविक रूप से बैठाए जा रहे बच्चों की संख्या की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यदि किसी बस में निर्धारित सीटों से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है अथवा छोटी स्कूल वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जाता है, तो यह बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर जोखिम है। ऐसे वाहनों की नियमित निगरानी और जांच की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
क्या सड़क पर निकलते समय होती है वास्तविक जांच?
स्कूल वाहन प्रतिदिन बच्चों को लेकर सड़कों पर चलते हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि परिवहन विभाग की टीम क्या केवल कार्यालय में दस्तावेजों की जांच करती है या सड़क पर चल रहे वाहनों में भी यह देखती है कि उनमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे तो नहीं बैठाए गए हैं?
यदि किसी वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे पाए जाते हैं तो वाहन स्वामी के साथ विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। साथ ही यदि कोई वाहन लंबे समय तक नियमों का उल्लंघन करता हुआ चलता रहा है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
बच्चों की सुरक्षा कागजों से नहीं, जमीन पर नियमों के पालन से होगी
स्कूल बस की फिटनेस और बीमा जरूरी है, लेकिन केवल वैध दस्तावेज होना ही बच्चों की पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। वाहन में निर्धारित संख्या में ही बच्चे बैठें, चालक प्रशिक्षित और पात्र हो, आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो तथा वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
परिवहन विभाग की मौजूदा कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन अब अभिभावकों की नजर इस बात पर रहेगी कि अभियान केवल कुछ वाहनों की जब्ती तक सीमित रहता है या जिलेभर में स्कूल बसों और वैन की व्यापक और नियमित जांच भी की जाती है।
सीधा सवाल
जब बच्चों को लेकर चलने वाले वाहन रोज सड़क पर हैं, तो क्या परिवहन विभाग प्रत्येक स्कूल वाहन की वास्तविक क्षमता, बच्चों की संख्या और सुरक्षा मानकों की जांच सुनिश्चित करेगा? बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही भविष्य में भारी पड़ सकती है। इसलिए जरूरत केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिसमें नियम टूटने से पहले ही उन्हें रोक दिया जाए।


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