विक्रांत बनारसी को साहित्य शिरोमणि अलंकरण से नवाजा गया

- सभी कवियों का अंगवस्त्र देकर किया गया सम्मान

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- शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी में हुआ काव्य सन्ध्या का आयोजन

राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश--

शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में शहीद स्थल पर काव्य संध्या का आयोजन रविवार को किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेन्द्र व मुख्य अतिथि सीताराम राय विक्रांत बनारसी तथा कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम की वाणी वंदना से आयोजन का आगाज हुआ।

साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मुख्य अतिथि सीताराम राय विक्रांत बनारसी को साहित्य शिरोमणि अलंकरण से नकद धनराशि, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न, अभिनंदन पत्र, लेखनी, डायरी, साहित्य कृति देकर विधिवत सारस्वत अभिनंदन किया गया। 

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संयोजन व सफल संचालन करते हुए प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने गंग ओ जमन हो, महकता चमन हो, आदमी सा मन हो शहादत नमन् हो सुनाकर वाहवाही लूटी। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने, जान दे दूंगी अपने वतन के लिए, तन मन धन मेरा अर्पित चमन के लिए, आओ मिलकर सजायें सभी एक हो, प्रीत मुस्कान चैन ओ अमन के लिए सुनाकर पूरी महफ़िल लूट लिया और सराहना बटोरीं। दिलीप सिंह दीपक ने बुजुर्गों ने लहू देकर रखी है आबरू इसकी, तुम सब कुछ बेच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो अपनी कालजयी रचना से सत्ता को नसीहत दे लोगों का मन मोहा।

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अशोक तिवारी ने प्यार मोहब्बत की शायरी, तुमसे हमने प्यार किया और क्या किया यूँ जिंदगी गुजार दिया और क्या किया सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम ने, तिरंगे में सजे अर्थी बजे धुन राष्ट्र गीतों की, जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले सुनाकर वीर शहीदों को नमन किया। 

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ओज के मुखर स्वर प्रभात सिंह चंदेल ने,हो जाऊँ कुर्बान अगर माँ भारती के चरणों में, मेरे मस्तक पर मेरा भारत महान लिख देना सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर देर तक तालियां बजवाते रहे। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने सस्वर लोकगीत, जागल रहा जवान औ जागल रहा किसान, तोहरे दम पर हिंदुस्तान सबकर तोहरे में परान, सुनाकर गतिज उर्जा का संचरण किया।

दिवाकर दिवेदी मेघ ने, आज कितना आदमी अब रह गया है आदमी, गंभीर चिंतन देकर लोगो को झकझोरा तो वहीं चर्चित हास्य रचना , बरवा कटाके कटकौवा, बीए पढ़े लागल बा बेटौवा सुनाकर श्रोताओं को देर तक हंसाते रहे। धर्मेश चौहान ने टीबी और बीबी हास्य रचना से लोगों को लोटपोट कर दिया तो वहीं देश गीत बड़ा ही सुंदर बड़ा ही मनहर अपना भारत देश सुनाकर चार चांद लगाया।

विवेक चतुर्वेदी शाइर ने, हुस्न की शोखियां ही ऐसी हैं, कोई कैसा भी हो फिसल जाये सुनाकर गजल कता नज्म से मन मोह लिया।सीताराम राय विक्रांत बनारसी ने ऐसे हालात हो गये अपने। अब जुबां का असर नहीं होता, तथा तेरे दर्द की हर चुभन चूम लेंगे, वतन तेरी खातिर कफन चूम लेंगे बलिदान की पराकाष्ठा को इंगित कर श्रोताओं को ज्वलंत मुद्दा दिया और देश की दिशा दशा पर नब्ज़ रक्खा। 

अंत में अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्य कार कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने आम आदमी की छटपटाहट भय भूख त्रासदी युद्ध हिंसा घृणा के बीच पिस रही मनुजता को बिंबित कर वक्तव्य देकर जागरण करते हुए कौमी एकता की मारक रचना, हमें रोटियां ही दीजिये बहुत भूख लगी है, दे रहे हैं गीता कुरान किसलिए तथा पंचायत घर में मिली है लाश देखिये सुनाकर आयोजन को पूर्णता दिये। सभी कवियों का अंगवस्त्र माल्यार्पण से सम्मान किया गया। आभार ऋषभ त्रिपाठी ने व्यक्त किया। 

इस अवसर पर बृज किशोर देव पांडेय, पुरुषोत्तम कुशवाहा, ठाकुर कुशवाहा, नीरज त्रिपाठी, सुनील देव, फारुख अली हाश्मी, विजयानंद चौहान, आद्या, अंशिका, शिव मोचन ,अनमोल पांडे ,ममता, समता, ऋचा, विजयशंकर त्रिपाठी आदि देर शाम तक जमे रहे।

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