सपा ‘सामाजिक न्याय यात्रा’ एवं पीडीए पंचायत का दो दिवसीय कानपुर दौरा  से संपन्न 

भाजपा सरकार जनता के बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाकर केवल प्रचार और दिखावे की राजनीति कर रही है।

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कानपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव के आह्वान तथा प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्याम लाल पाल के निर्देशन में राष्ट्रीय सचिव सरदार कुलदीप सिंह भुल्लर का दो दिवसीय कानपुर दौरा रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर अध्यक्ष हाजी फज़ल महमूद के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शहर के विभिन्न गुरुद्वारों और सामाजिक स्थलों पर सिख समाज, व्यापारियों, युवाओं एवं विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ संवाद स्थापित किया गया तथा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।
 
कानपुर आगमन पर अमरजीत सलूजा के नेतृत्व में राष्ट्रीय सचिव सरदार कुलदीप सिंह भुल्लर का भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सिख समाज के प्रबुद्ध लोगों ने उनका अभिनंदन किया। दो दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने कीर्तनगढ़ गुरुद्वारा साहिब, गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा साहिब, ऐतिहासिक गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब, रामगढ़िया गुरुद्वारा साहिब एवं लाटूश रोड गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर संगत को संबोधित किया।
 
अपने संबोधन में राष्ट्रीय सचिव सरदार कुलदीप सिंह भुल्लर ने कहा कि आज प्रदेश और देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ते अपराध, किसानों की बदहाली, युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति तथा छोटे व्यापारियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ से परेशान है। भाजपा सरकार जनता के बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाकर केवल प्रचार और दिखावे की राजनीति कर रही है, जबकि आम आदमी बिजली के बढ़े हुए बिल, महंगी शिक्षा, महंगे इलाज और रोजगार के संकट से जूझ रहा है।
 
सरदार कुलदीप सिंह भुल्लर ने कहा कि देश की आजादी, सीमाओं की रक्षा और राष्ट्र निर्माण में सिख समाज का योगदान अतुलनीय रहा है, लेकिन आज सिख समाज से जुड़े अनेक मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति समाजों को आपस में बांटने की रही है और सिख समाज को भी आधा-अधूरा इतिहास दिखाकर भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि तराई क्षेत्र के सिख किसानों के सामने भूमि और मालिकाना हक से जुड़े प्रश्न आज भी चिंता का विषय बने हुए हैं तथा सरकार संवेदनशीलता के साथ इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित है।

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