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जनपद में भूमि विवादों के चिन्हित मामलों की होगी पुनः जांच, वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित करने को शासन का विशेष अभियान शुरू

भूमि विवादों के निस्तारण को लेकर विशेष अभियान शुरू, हर मामले की होगी दोबारा जॉच-जिलाधिकारी

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राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -

भूमि विवादों के प्रभावी, पारदर्शी एवं स्थायी निस्तारण के उद्देश्य से शासन द्वारा एक माह का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। 01 जून से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस अभियान के तहत पूर्व में निस्तारित किए गए भूमि विवादों की पुनः जांच कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। इसी क्रम में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल भूमि संबंधी मामलों के लिए संचालित किया जा रहा है। इसमें भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा, सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, चकबंदी संबंधी विवाद, राजस्व एवं पुलिस विभाग से जुड़े भूमि प्रकरण तथा अन्य भूमि विवादों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है।

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जिलाधिकारी ने बताया कि शासन के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि अनेक मामलों में शिकायतों का निस्तारण कागजी स्तर पर कर दिया गया अथवा उन्हें स्पेशल क्लोज की श्रेणी में बंद कर दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर विवाद का वास्तविक समाधान नहीं हो सका। कुछ मामलों में अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत कर निस्तारण दर्शा दिया गया। ऐसे मामलों की अब तहसील, जिला एवं मंडल स्तर पर दोबारा समीक्षा की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

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उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का भौतिक सत्यापन करते हुए उसकी निष्पक्ष एवं तथ्यपरक रिपोर्ट तैयार की जाए। सभी मामलों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगाकृ वास्तविक रूप से निस्तारित मामले, निस्तारित लेकिन फील्ड सत्यापन योग्य मामले, अनिस्तारित मामले तथा ऐसे मामले जो भूमि विवाद की श्रेणी में नहीं आते हैं।

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जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि शासन द्वारा विभिन्न प्रकार के भूमि विवादों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित की गई है। ग्राम स्तर के विवादों, सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, राजस्व न्यायालय, सिविल न्यायालय, चकबंदी न्यायालय तथा उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में वाद संख्या, सीएनआर संख्या एवं अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा तथा अंतिम न्यायिक आदेश प्राप्त होने के बाद ही शिकायत का अंतिम निस्तारण माना जाएगा।

उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि भू-माफियाओं एवं कमजोर वर्गों की भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रत्येक तहसील में न्याय पंचायतवार ग्राम चौपाल आयोजित कर भूमि विवादों का मौके पर गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी निस्तारण कराया जाए, जिससे लोगों को तहसील और न्यायालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान की नियमित समीक्षा मंडलायुक्त स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी।

किसी भी स्तर पर लापरवाही, गलत निस्तारण अथवा भ्रामक रिपोर्ट पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित भी किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की यह पहल केवल शिकायतों की संख्या कम करने के लिए नहीं, बल्कि भूमि विवादों का वास्तविक, निष्पक्ष एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए है। सभी अधिकारी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए अभियान को सफल बनाएं, ताकि आमजन को त्वरित न्याय मिले और भूमि विवादों से जुड़े मामलों का प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

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