भोलेनाथ के दरबार में भ्रष्टाचार का आरोप: यात्री निवास की छत निर्माण पूरा होते ही दरकी, मचा बवाल

मुख्यमंत्री वंदन योजना के कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, नगरवासियों ने घटिया निर्माण का लगाया आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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बलरामपुर (पचपेड़वा)। आदर्श नगर पंचायत पचपेड़वा स्थित प्रसिद्ध शिवगढ़ धाम मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री वंदन योजना के तहत कराए जा रहे करोड़ों रुपये के विकास कार्य अब विवादों के घेरे में आ गए हैं। लगभग करोड़ो रुपये की लागत से निर्मित यात्री निवास की छत निर्माण कार्य पूरा होने के तुरंत बाद ही दरक गई और उसमें पानी का रिसाव शुरू हो गया। संभावित हादसे की आशंका को देखते हुए नगर पंचायत ने क्षतिग्रस्त छत को तुड़वा दिया। घटना के बाद पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
 
मुख्यमंत्री वंदन योजना के अंतर्गत मंदिर परिसर में तालाब सौंदर्यीकरण, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, स्ट्रीट लाइट और यात्री निवास सहित कई विकास कार्य कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसके कारण नई छत निर्माण के कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त हो गई। नगरवासियों का कहना है कि जैसे ही चेयरमैन रवि वर्मा को छत क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली, बिना किसी सार्वजनिक सूचना के उसे तुड़वाने का कार्य शुरू करा दिया गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे।
 
नगर पंचायत प्रशासन की ओर से बताया गया कि ठेकेदार द्वारा स्वीकृत मानक से कम ऊंचाई पर छत डाल दी गई थी, इसलिए उसे हटाया गया। हालांकि इस दलील को स्थानीय लोगों ने स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि यदि निर्माण स्वीकृत नक्शे, डिजाइन और इस्टीमेट के अनुरूप नहीं हो रहा था, तो संबंधित अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी पूरे निर्माण के दौरान क्या कर रहे थे। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या निर्माण कार्य की नियमित निगरानी नहीं की जा रही थी।
 
पूर्व सभासद एवं नगर निवासी धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी शिकायत भेजकर मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। नगरवासियों का आरोप है कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि केवल छत दोबारा बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे भवन की तकनीकी जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
 
साथ ही दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। फिलहाल क्षतिग्रस्त छत को हटाकर दोबारा निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायतों और उठ रहे सवालों के बीच इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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