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पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन का प्रत्यक्ष दस्तावेज है नील नायक
यह हमारी अस्मिता का प्रश्न है कि हम अपने महापुरुषों को किस रूप में याद करते हैं
स्वतंत्र प्रभात | संवाददाता अतुल कुमार
बेतिया। हम विदेशों का इतिहास तो पढ़ लेते हैं, हम दूसरी सभ्यताओं की जानकारी तो कर लेते हैं; लेकिन स्थानीय महापुरुषों के बारे में नहीं जानते। अपने महापुरुषों के प्रति यह उदासीनता हमारे लिए बहुत दुखद है। अगर हमने अपने महापुरुषों के बारे में आने वाली पीढ़ी को नहीं बताया तो फिर इतिहास से मिटते देर नहीं लगेगी। यह हमारी अस्मिता का प्रश्न है कि हम अपने महापुरुषों को किस रूप में याद करते हैं। राजकुमार शुक्ल भी आजादी की लड़ाई के ऐसे ही नायक हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों में स्थान नहीं मिला।
जबकि सच्चाई यह है कि गांधी जी को महात्मा बनाने वाले अगर कोई थे, वे राजकुमार शुक्ल थे। उपर्युक्त बातें पूर्व क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ब्रजेश ओझा ने कही। वे सेराजेम के सभागार में प्रसिद्ध नाटककार और चम्पारन साहित्य संस्थान के संयोजक डॉ दिवाकर राय की पुस्तक 'नील नायक' के लोकार्पण समारोह में उपस्थित सैकड़ों साहित्यकारों को संबोधित कर रहे थे । इसके पूर्व दीप प्रज्वलन तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अतिथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद आभाष झा ने शिव वंदना का मंगल पाठ किया। तत्पश्चात् सभी आगत अतिथियों का अंगवस्त्र से स्वागत -सम्मान किया गया। फिर सभी अतिथियों ने डॉ दिवाकर राय द्वारा रचित नाटक 'नील नायक' का लोकार्पण किया। लोकार्पण के पश्चात् पुस्तक पर अतिथियों ने अपने गंभीर विचार व्यक्त किए।
राजकुमार शुक्ल की वंश परंपरा के वाहक मणिभूषण राय ने पुस्तक पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने घर परिवार की परवाह न करते हुए जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन अंग्रेजों से भारत की मुक्ति में खपा दिया, ऐसे महापुरुषों को वर्तमान व्यवस्था ने भुला दिया। सिर्फ चंद लोगों का नाम आजादी के नायकों में शामिल है, यह कितना दुखद है। डॉ दिवाकर राय की कृति 'नील नायक' ऐसे ही वास्तविक नायकों को स्थापित करने का एक प्रयास है। यह मेरे लिए तथा पूरे चंपारण के लिए सौभाग्य की बात है कि पंडित राजकुमार शुक्ल पर आधारित नाटक का प्रणयन किया गया है। इस अवसर पर वरीय साहित्यकार सुरेश कुमार गुप्त ने चंपारण के निलहा आंदोलन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए 'नील नायक' के विविध प्रसंगों का उल्लेख किया। पुस्तक पर अपना विचार रखने वालों में पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार सिंह ने पंडित जी की प्रतिमा जिला मुख्यालय में स्थापित करने की मांग की तथा इसके लिए सभी लोगों से आगे आने का आह्वान किया। महारानी जानकी कुँअर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ सुरेन्द्र प्रसाद केसरी ने निलहा आंदोलन की पृष्ठभूमि पर रचित विभिन्न पुस्तकों की चर्चा की। वरीय साहित्यकार नंद कुमार मिश्र ने चंपारण के विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण करते हुए आज की नयी पीढ़ी में उनके महान त्याग और बलिदान को पहुँचाने का अनुरोध किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ। इसमें अरुण गोपाल, सत्येन्द्र गोविन्द, अंशुमन कुमार, गोविन्द कुमार मिश्र, श्वेता कुमारी चौबे, शालिनी रंजन, अर्पणा कुमारी, अनुराग कुमार ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंजनी कुमार सिन्हा ने तथा मंच संचालन कृष्ण मोहन प्रसाद और प्रशांत सौरभ ने किया। इस अवसर पर डॉ अनिल कुमार मोटानी, डॉ देवीलाल यादव, मदन बनिक, नरेंद्र झा, गोविन्द झा, अरविंद कुमार मिश्र, कुंदन शांडिल्य, उत्तम मोटानी, सत्येन्द्र शरण, रवीन्द्र किशोर राय, इन्दु देवी, राजकिशोर प्रसाद, राजा राम राय, अखिलेश्वर मिश्र, ललन पाण्डेय लहरी, मृत्युंजय पाण्डेय, निकुंज कुमार दुबे, प्रमोद कुमार, जीतेन्द्र कुमार, मुनीन्द्र मिश्र, जय किशोर जय, चन्द्रिका राम, पंकज कुमार सहित सैकड़ों साहित्यकार व साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
जितेंद्र कुमार राजेश


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