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बायोफोर्टिफाइड धान की खेती से सुधरेगा स्वास्थ्य, कुपोषण पर लगेगी रोक : डॉ सर्वजीत
उन्होंने बताया कि जिंको राइस एमएस नामक प्रजाति में जिंक की मात्रा 27.4 पीपीएम तक पाई जाती है
सिद्धार्थनगर। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने किसानों से बायोफोर्टिफाइड धान की किस्मों की खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यदि किसान बायोफोर्टिफाइड धान की खेती करते हैं, तो इससे न केवल अच्छी उपज प्राप्त होगी, बल्कि मानव स्वास्थ्य में भी सुधार होगा और कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सर्वजीत ने बताया कि बायोफोर्टिफाइड चावल आयरन और जिंक जैसे आवश्यक खनिज तत्वों का अच्छा स्रोत है। इन पोषक तत्वों से भरपूर अनाज के सेवन से शरीर में पोषण की कमी दूर होती है, एनीमिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुपोषण एक बड़ी चुनौती है, जिसे बायोफोर्टिफाइड फसलों के माध्यम से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों तथा कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों के विकास पर लगातार कार्य किया जा रहा है। धान की प्रमुख बायोफोर्टिफाइड किस्मों में सीआर धान 310, 311 और 315 शामिल हैं। ये प्रजातियां 125 से 130 दिन में तैयार होती हैं तथा इनकी उपज 45 से 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त होती है।
इसके अतिरिक्त डीआरआर धान 45, 48 और 49 भी महत्वपूर्ण बायोफोर्टिफाइड प्रजातियां हैं, जो 130 से 135 दिन में पककर तैयार होती हैं और 48 से 52 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती हैं। इन प्रजातियों में जिंक की मात्रा 22 से 25 पीपीएम तक पाई जाती है, जबकि सामान्य धान की किस्मों में जिंक की मात्रा केवल 12 से 16 पीपीएम होती है।उन्होंने बताया कि जिंको राइस एमएस नामक प्रजाति में जिंक की मात्रा 27.4 पीपीएम तक पाई जाती है,
जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। जिंक एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो शरीर की वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। डॉ. सर्वजीत ने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक धान की किस्मों के साथ-साथ बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों की खेती को प्राथमिकता दें, ताकि खेती लाभकारी होने के साथ समाज भी स्वस्थ और पोषित बन सके।
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