‘शापित बंगला’! 5 देशरत्न मार्ग में जो भी बना डिप्टी सीएम,वो नहीं पूरा कर पायाअपना कार्यकाल
उसने इस बंगले को बिहार की राजनीति में रहस्यमयी पहचान जरूर दी है
स्वतंत्र प्रभात | पटना , बिहार ब्यूरो
प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश
बिहार की सियासत में इन दिनों एक सरकारी बंगला खूब चर्चा में है।बिहार की राजधानी पटना स्थित 5 देशरत्न मार्ग का यह वीआईपी आवास राजनीतिक गलियारों में अब ‘शापित बंगला’ कहा जाने लगा है। वजह साफ है कि यहां रहने वाले कई उपमुख्यमंत्री अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। अब राजनीतिक पटल पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बंगले का अगला ‘शिकार’ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी होंगे?
तेजस्वी यादव भी हो चुके हैं शिकार
साल 2015 में महागठबंधन सरकार बनने के बाद तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री के रूप में यह बंगला आवंटित किया गया था। लेकिन 2017 में राजनीतिक उठापटक के बीच उन्हें टर्म पूरा किये ही पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद से इस बंगले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी ज्यादा दिन नहीं टिक सके
साल 2017 में बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद यह आवास सुशील कुमार मोदी को मिला। हालांकि कुछ समय बाद ही बीजेपी ने उन्हें बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया। इसके बाद यह बंगला नए उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को आवंटित किया गया।
तारकिशोर प्रसाद को भी छोड़ना पड़ा बंगला
भाजपा नेता तारकिशोर प्रसाद उपमुख्यमंत्री रहते हुए इसी बंगले में रहे, लेकिन बिहार की राजनीति में हुए अचानक बदलाव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के फैसले के बाद उन्हें भी यह बंगला खाली करना पड़ा।
सम्राट चौधरी का भी रहा ठिकाना
अब चर्चा इसलिए तेज है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उपमुख्यमंत्री रहते हुए इसी बंगले में रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने बंगले की दिशा और दशा दोनों में बदलाव कराया था। राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि इसी बंगले में रहते हुए उन्होंने डिप्टी सीएम से मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया।
अब मुख्यमंत्री आवास का हिस्सा बना बंगला
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बंगले को 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास परिसर में शामिल कर लिया गया है। यानी अब 5 देशरत्न मार्ग अलग आवास नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री आवास का हिस्सा बन चुका है।हालांकि ‘शापित बंगला’ वाली चर्चा महज राजनीतिक गलियारों और लोगों की मान्यताओं तक सीमित है, लेकिन जिस तरह यहां रहने वाले कई बड़े नेताओं का कार्यकाल अधूरा रहा, उसने इस बंगले को बिहार की राजनीति में रहस्यमयी पहचान जरूर दी है। अच्छी और आकर्षक खबर के लिए स्वतंत्त्र प्रभात पोर्टल से जुड़े रहे।


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