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माटी का सोना: आधुनिक खेती से 74 वर्षीय किसान वीरेंद्र सिंह ने रचा सफलता का इतिहास
माटी का सोना: एक किसान की सफलता की गाथा
सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक तकनीक और कड़ी मेहनत के दम पर बाजरे की खेती में राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार हासिल कर मोहम्मदाबाद के किसान वीरेंद्र सिंह बने क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत
फ़िरोज़ाबाद /टूण्डला-
फिरोजाबाद जिले के टूण्डला के पास बसे मोहम्मदाबाद गांव की सुबह इन दिनों कुछ अलग नजर आती है। खेतों में लहलहाती बाजरे की फसल और उसे देखकर 74 वर्षीय बुजुर्ग एवं अनुभवी किसान वीरेंद्र सिंह के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि, उनकी वर्षों की मेहनत और बदलती कृषि सोच की कहानी बयां करती है। उम्र के इस पड़ाव पर भी खेती के प्रति उनका उत्साह किसी युवा किसान से कम नहीं है।
एक समय था जब खेती में लगातार बढ़ती लागत, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और सीमित संसाधनों के कारण पैदावार अपेक्षाकृत कम रहती थी। लेकिन वीरेंद्र सिंह ने परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय कृषि में बदलाव का रास्ता चुना। उन्होंने राज्य सरकार की ‘आत्मा योजना’ और कृषि विभाग की विभिन्न पहलों से जुड़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना शुरू किया।
बाजरे की आधुनिक खेती के लिए उन्हें बीज, खाद और खरपतवार नाशक दवाओं पर उचित अनुदान का लाभ मिला। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिली और उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हुए। योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से भी निरंतर संबल मिला।
देश के प्रमुख कृषि संस्थानों का किया भ्रमण
कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को समझने और उन्हें अपने खेतों में लागू करने के उद्देश्य से राज्य सरकार की पहल पर वीरेंद्र सिंह को तेलंगाना, उदयपुर, अजमेर, पंतनगर तथा दिल्ली स्थित ICAR-पूसा जैसे देश के प्रमुख कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानों का भ्रमण कराया गया। इन संस्थानों में उन्होंने उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों तथा फसल प्रबंधन के नए तरीकों को करीब से समझा। उन्होंने वहां प्राप्त जानकारी को अपने खेतों में प्रयोग किया और धीरे-धीरे इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे।
बाजरे के उत्पादन में राज्य स्तर पर हासिल किया प्रथम स्थान
वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और वर्षों के अनुभव के साथ की गई कड़ी मेहनत का परिणाम यह रहा कि वीरेंद्र सिंह ने बाजरे के उत्कृष्ट उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त कर राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गांव के लिए गौरव का विषय बनी, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।
जिलाधिकारी का भी रहा विशेष सहयोग
वीरेंद्र सिंह की सफलता के पीछे उनके निरंतर प्रयासों और मेहनत के साथ-साथ जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के विशेष सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिलाधिकारी द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि शासन की जनकल्याणकारी नीतियों और कृषि प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र एवं अंतिम किसान तक पहुंचे।सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने और उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने वीरेंद्र सिंह जैसे किसानों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।
15 वर्षों से किसानों का कर रहे मार्गदर्शन
वीरेंद्र सिंह केवल अपने खेतों तक सीमित रहने वाले किसान नहीं हैं। वह पिछले 15 वर्षों से चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर की कृषक समिति, जनपद फिरोजाबाद के अध्यक्ष के रूप में अन्य किसानों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।अपने अनुभव और कृषि संबंधी जानकारी को दूसरे किसानों के साथ साझा कर वह उन्हें आधुनिक तकनीकों को अपनाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
युवाओं को कृषि से जुड़ने का दिया संदेश
अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए 74 वर्षीय किसान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि किसान खेती के साथ थोड़ा समय निकालकर कृषि विभाग की योजनाओं और उनके लाभ की जानकारी प्राप्त करें तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो खेती में अपार संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षित युवा वर्ग को भी कृषि की ओर ध्यान देना चाहिए। जितना अधिक शिक्षित व्यक्ति कृषि से जुड़ेगा, उतना ही किसान और देश का विकास होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों के हित में संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं और कृषि प्रोत्साहन कार्यक्रमों का सही लाभ लेकर किसान अपनी आय और उत्पादन दोनों में सुधार कर सकते हैं।
“खेत और खलिहान में जब पहुँचे विज्ञान...”
वीरेंद्र सिंह ने अपनी बात को एक प्रेरक पंक्ति में समेटते हुए कहा—“खेत और खलिहान में जब पहुँचे विज्ञान, तब किसान और देश भी होता है बलवान।”वीरेंद्र सिंह की सफलता यह संदेश देती है कि उम्र कभी सीखने और आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनती। दृढ़ इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक, मेहनत और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो खेती केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय भी बन सकती है।मोहम्मदाबाद के खेतों से निकली वीरेंद्र सिंह की यह कहानी आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और यह साबित कर रही है कि माटी में मेहनत का बीज बोया जाए तो वही माटी सफलता का सोना उगल सकती है।


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