साहित्य की सुरमयी शाम में याद किये गये स्व.पं.रामयज्ञ पाण्डेय 

महाविद्यालय गौरामाफी ने कहा कि पूर्व प्रधानाचार्य पं. जी संघर्षपूर्ण व्यक्ति थे उनका स्वभाव हर व्यक्ति के लिए बहुत अच्छा था।

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प्रतापगढ़। स्व.पं.रामयज्ञ पाण्डेय पूर्व प्रधानाचार्य के स्मृति दिवस पर उनके सुपुत्र शिक्षक पं. राकेश पाण्डेय के द्वारा आयोजित एवं कई शिक्षण संस्थान के प्रबन्धक पं. अनिल प्रताप त्रिपाठी "प्रवात"के संयोजन में उनके निवास ग्राम सैलखा पट्टी में भव्य विचार गोष्ठी के साथ कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ।  स्व. पांडेय जी चाहते थे कि हर परिवार के बच्चे शिक्षित हों ।
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पवन कुमार सिंह,पूर्व प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक, भारत सिंह इण्टर कॉलेज कुम्हिया पट्टी रहे।मुख्य अतिथि पवन कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि पं. जी बहुत ही नेक दिल इंसान के साथ साथ युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत थे, उनके व्यक्तित्व पर लिखी गई एक किताब कम पड़ जायेगी। विशिष्ट अतिथि रहे बद्री नारायण मिश्र ,पूर्व प्राचार्य मुनीश्वरदत्त संस्कृत महाविद्यालय गौरामाफी ने कहा कि पूर्व प्रधानाचार्य पं. जी संघर्षपूर्ण व्यक्ति थे उनका स्वभाव हर व्यक्ति के लिए बहुत अच्छा था।
 
उसी क्रम में ओंकार नाथ मिश्र,पूर्व उप ब्लाक प्रमुख ने कहा कि प्रधानाचार्य अपने आप में एक बेमिसाल व्यक्ति थे उनका कोई तोड़ या जोड़ नहीं था।वहीं उद्घाटन अतिथि भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानाचार्य स्व. पं. रामयज्ञ पाण्डेय एक आदर्श शिक्षक ही नहीं बल्कि एक अच्छे व्यक्ति भी थे। आचार्य नरेंद्र देव माध्यमिक विद्यालय नरेन्द्र नगर विनैका प्रतापगढ़ गवाह है कि समाज व शिक्षा के प्रति कितने जिम्मेदार थे ऐसे महामानव को मैं बार बार नमन करता हूं।
 
कार्यक्रम का संयोजन कर रहे पं. अनिल प्रताप त्रिपाठी "प्रवात"ने कहा कि स्व. पं. जी संघर्ष करने वाले व्यक्ति थे,उनका जीवन सदा संघर्षशील रहा।कार्यक्रम की शुरुआत कल्पना तिवारी के वाणी वंदना से हुई।अयोध्या से पधारी पूनम मिश्रा ने पढ़ा "इनसे थोड़ी प्रीत लगाकर देखो तो तुमको सारे दर्द मुहैय्या कर देंगे"।वहीं अंबेडकर नगर से आई कवयित्री प्रतिमा तिवारी ने पढ़ा "खामोश सारे दिल के अरमान हो गए ऐसा लगा हम रेत के मकान हो गये"।
 
प्रतापगढ़ की कवयित्री चाँदनी दुबे ने पढ़ा "मिलता है अगर दोस्त के हाथों से तुझे, तो जहरे हलाहल कर ले"। जनपद के अन्य कवियों में प्रेम कुमार त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय गड़बड़, दिनेश चन्द्र त्रिपाठी,हमदम प्रतापगढ़ी, योगेश सिंह, राकेश कुमार पाण्डेय एवं नियाज़ प्रतापगढ़ी ने अपनी रचना “आज कल मन उदास रहता है,सारा सावन उदास रहता है,आप क्या छोड़कर गए आँगन,घर का आँगन उदास रहता है।" रचना के माध्यम से स्व. पंडित जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. हरि प्रसाद मिश्रा,पूर्व एयर फोर्स ऑफीसर ने किया। रविन्द्र अजनबी ने कुशल संचालन से शमां बांध दिया।
 
इस अवसर पर अंजनी कुमार सिंह, बसंत प्रसाद पाण्डेय, कैलाश नाथ तिवारी, प्रभाकर त्रिपाठी, विजय प्रताप त्रिपाठी, अजीत प्रताप त्रिपाठी, रफ़ीक खान, काशी नारायण मिश्रा, रत्मेश रावत, पवन पाण्डेय, भुनेश्वर विश्वकर्मा, बलराम पाण्डेय, राम लवट यादव, नेता कांग्रेस, राकेश त्रिपाठी, अनिल पाण्डेय, छोटे लाल निषाद, हरिकेश पाण्डेय, अखिल नारायण सिंह, सुरेश मिश्रा, रविकांत पाण्डेय एवं पुजारी जी उपस्थित रहे एवं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के आयोजक रहे राकेश कुमार पाण्डेय ने आये हुए कवियों का  स्वागत अंग वस्त्र एवं माला पहनाकर किया एवं आये हुये सभी अतिथिओं का आभार व्यक्त किया।

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