राम-नाम की ज्योति जलाई...!
वह रामचरित के रचयिता, भक्ति-भाव के गायक,
जन-जन के मन में बसें, तुलसीदास महानायक।
शब्दों में उन्होंने "मर्यादा" रखी चौपाई में संस्कार,
राम-नाम की ज्योति जलाई, मिटा दिया अंधकार।
अवधी की मीठी बोली में, भक्ति का है रस घोला,
मानस बन घर-घर पहुँचे, हर मन का पट खोला।
राम में देखा सत्य सनातन और सीता में विश्वास,
यूं हनुमत सेवा से सीखें, भक्ति का मधुर प्रकाश।
न धन माँगा, न यश चाहा, बस प्रभु का गुणगान,
तुलसी ने साहित्य जगत को दिया अमर वरदान।
आज तुलसी जयंती पे हम, श्रद्धा से शीश नवाएँ,
उनके बताए सत्य-धर्म के, पथ पर कदम बढ़ाएँ।
संजय एम तराणेकर
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