हिंदी साहित्य

किस्सागोई: जो समय से परे जाकर मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है

  कृति आरके जैन जब भीतर की अनुभूतियाँ शब्द बनकर फूट पड़ती हैं और कल्पना समय की दीवारों को लाँघकर दूर-दूर तक अपनी छाया बिखेर देती है—तभी किस्सागोई का असली जादू आकार लेता है।  20 मार्च इसी अदृश्य, गहरे असर...
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