मिर्ज़ापुर में धान खरीद घोटाला: ट्रांसफर रुकवाने और क्लीन चिट की साज़िश पर फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा, विभागीय कार्यालय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
मीरजापुर।
मिर्ज़ापुर।उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में किसानों के हक पर डाका डालने और भ्रष्टाचार में डूबी पड़री क्रय केंद्र की विपणन निरीक्षक दीपिका बरनवाल को बचाने के लिए विभागीय कार्यालय के भीतर काले खेल का पर्दाफाश हुआ है। एक तरफ जहां आरोपी अधिकारी का प्रशासनिक स्थानांतरण सोनभद्र जिले के लिए हो चुका है, वहीं कार्यालय के कुछ भ्रष्ट बाबू और अधिकारी 'महिला होने के नाम पर सहानुभूति' का ढोंग रचकर और मोटी रकम के लेनदेन के जरिए इस ट्रांसफर को रुकवाने की जुगत में लगे हैं। इतना ही नहीं, जांच के नाम पर महज खानापूर्ति कर कार्यालय में बैठकर सेटिंग के जरिए क्लीन चिट देने का नापाक प्रयास भी किया जा रहा है।
इस खुली सांठगांठ और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की खबर सामने आते ही जिले के किसानों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश फैल गया है।
कार्यालय के भीतर चल रहा है सेटिंग और लीपापोती का खेल
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, आरोपी विपणन निरीक्षक दीपिका बरनवाल पिछले करीब 6 वर्षों से एक ही मलाईदार कुर्सी पर कब्जा जमाकर किसानों का शोषण कर रही हैं। जब उनके काले कारनामों की शिकायत जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार गौतम द्वारा की गई, तो विभाग ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती का षड्यंत्र रच दिया। अब सोनभद्र ट्रांसफर के आदेश को फाइल में दबाकर और कार्यालय के एक खास बाबू के माध्यम से सेटिंग कर आरोपी को बचाने की पूरी पटकथा लिखी जा रही है।
अन्नदाताओं और जनप्रतिनिधियों का फूटा गुस्सा — तीखी प्रतिक्रिया
कार्यालय स्तर पर चल रहे इस भ्रष्टाचार और संरक्षण के खेल के खिलाफ अब क्षेत्र के तमाम किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की हुंकार भर दी है।
किसान नेता सिद्धनाथ यादव ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि, "किसानों का खून चूसने वाली इस भ्रष्ट अधिकारी को बचाने के लिए विभागीय कार्यालय अखाड़ा बन गया है। यदि ट्रांसफर रोकने या क्लीन चिट देने का कुचक्र बंद नहीं हुआ, तो विभाग को किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा
प्रधान संघ के जिला प्रभारी रामदेव सरोज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, "भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को बचाने वाले विभागीय बाबू और अधिकारी खुद इस अपराध में बराबर के साझेदार हैं। किसानों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसान नेता राकेश यादव ने दो टूक शब्दों में चेताया कि, "यह सरकार और अन्नदाताओं दोनों के साथ धोखा है। एक तरफ ट्रांसफर का नाटक और दूसरी तरफ अंदरखाने सेटिंग—यह विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है
क्षेत्र पंचायत सदस्य अनिल मौर्या ने कहा कि, "पड़री क्रय केंद्र भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। आरोपी को बचाने के लिए जो अधिकारी ढाल बने हैं, उन पर भी तत्काल विभागीय गाज गिरनी चाहिए।"
कन्हैया लाल, बंशीधर और उमेश कुमार आदि ने संयुक्त रूप से आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, "यदि आरोपी दीपिका बरनवाल का सोनभद्र ट्रांसफर तत्काल सख्ती से लागू कर रिलीव नहीं किया गया और कार्यालय के भ्रष्ट कर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।"
आर-पार की चेतावनी
प्रधान संघ अध्यक्ष ब्यास जी बिंद और जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार गौतम सहित तमाम अन्नदाताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस मिलीभगत और सेटिंग के जरिए आरोपी को बचाने का प्रयास जारी रहा, तो विभागीय कार्यालय का घेराव किया जाएगा। जनता और किसान मांग कर रहे हैं कि ट्रांसफर आदेश तत्काल प्रभावी हो और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले तमाम चेहरों बेनकाब कर उनके खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाए।


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