खाद्य सुरक्षा या भ्रष्टाचार की ढाल? मिर्ज़ापुर में धान खरीद घोटाले पर जांच अधिकारियों और विपणन निरीक्षक की खुली सांठगांठ

प्रवीण तिवारी Picture
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मीरजापुर। 

 मिर्ज़ापुर में किसानों के हक पर डाका डालने और क्रय केंद्रों पर चल रहे काले कारोबार की परतें उधड़ने लगी हैं। पड़री क्रय केंद्र पर व्याप्त भ्रष्टाचार के मामले में जब जांच बिठाई गई, तो जांच अधिकारियों ने न्याय के बजाय आरोपी को बचाने का घटिया खेल खेला, जिससे किसानों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा है।

 आरोपी के विभागीय और समकक्ष अधिकारियों को बनाया जांच अधिकारी

जिला खाद्य विपणन अधिकारी कार्यालय के पत्रांक-482 (31 जुलाई 2026) के तहत जिला पंचायत सदस्य साजन कुमार गौतम ने शिकायत की थी कि पड़री क्रय केंद्र पर तैनात विपणन निरीक्षक दीपिका बरनवाल पिछले करीब 6 वर्षों से एक ही मलाईदार कुर्सी पर बैठकर किसानों का शोषण कर रही हैं। वास्तविक किसानों को बैरंग लौटाकर बिचौलियों के जरिए अवैध उगाही का खेल चल रहा है। इस गंभीर शिकायत पर लीपापोती के मकसद से क्षेत्रीय

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विपणन अधिकारी प्रियरंजन राजीव और विपणन निरीक्षक रोहित कुमार सिंह की दो सदस्यीय जांच कमेटी थोप दी गई।
 प्रधान संघ अध्यक्ष का आक्रामक तेवर और रिश्वत का
 सनसनीखेज खेल
प्रधान संघ के अध्यक्ष ब्यास जी बिंद एडवोकेट ने तीखा रुख अपनाते हुए पर्दाफाश किया कि मौके पर पहुंचे जांच अधिकारी किसी स्वतंत्र एजेंसी की तरह नहीं, बल्कि आरोपी के निजी वकील की तरह पेश आ रहे थे। वहीं, शिकायतकर्ता साजन कुमार गौतम ने खुलासा किया कि आरोपी अधिकारी ने एक मिल मालिक के जरिए शिकायत वापस लेने के एवज में 1 लाख रुपए की रिश्वत की पेशकश की। साथ ही धमकी दी गई कि पैसे न मिलने पर यही रकम जांच अधिकारियों को देकर मनचाही क्लीन चिट वाली रिपोर्ट तैयार करवा ली जाएगी।

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 धरातल पर किसानों के साथ मजाक और पीठ पीछे फिक्सिंग

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जांच के तय दिन सुबह 10 बजे से डटे वास्तविक किसानों को दोपहर 12 बजे तक टाले रखा गया और एक भी बयान दर्ज नहीं किया गया। विरोधियों को टरकाने के लिए जांच अधिकारी प्रियरंजन राजीव ने बहाना बनाया कि 'आज बारिश की वजह से नहीं आ पाएंगे'। जैसे ही विरोधी किसान वहां से हटे, एक खास मिल मालिक और चुनिंदा पक्षीय लोगों को बैठाकर आनन-फानन में बयान दर्ज कर लिए गए, ताकि रिपोर्ट 'ठीक-ठाक' दिखाई जा सके।

जब जांच करने वाले खुद आरोपी के संरक्षक बन जाएं, तो किसानों को न्याय कहां से मिलेगा? यह भ्रष्टाचार को बचाने का आपराधिक षड्यंत्र है।" — ब्यास जी बिंद (प्रधान संघ अध्यक्ष) एवं साजन कुमार गौतम (जिला पंचायत सदस्य)

 आर-पार की लड़ाई का ऐलान
प्रधान संघ अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य ने चेतावनी दी है कि यदि इस लीपापोती भरी रिपोर्ट से आरोपी को बचाया गया, तो अन्नदाताओं का गुस्सा सड़कों पर फूटेगा। जनता मांग कर रही है कि आरोपी दीपिका बरनवाल के साथ-साथ उनकी ढाल बने भ्रष्ट जांच अधिकारियों (प्रियरंजन राजीव व रोहित कुमार सिंह) को भी तत्काल निलंबित कर मुकदमा दर्ज किया जाए।

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