जहां जरूरत नहीं, वहां रोशनी जहां अंधेरा वहां इंतजार CSR की स्ट्रीट लाइट योजना पर उठे सवाल

जनहित या खानापूर्ति सिरसोती में स्ट्रीट लाइट की लोकेशन बनी विवाद की वजह, रोशनी पहुंची वहां जहां जरूरत कम ,अंधेरे में छूटे आबादी वाले इलाके

राजेश तिवारी Picture
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संतोष कुमार गुप्ता ( संवाददाता) 

बीजपुर/ सोनभद्र -

एनटीपीसी रिहन्द द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत सिरसोती क्षेत्र में लगाई गई लगभग 36 स्ट्रीट लाइटें अब सवालों के घेरे में हैं। जिस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को अंधेरे से राहत देना था, उसी योजना में लाइटों की लोकेशन को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं, वहां आबादी बहुत कम है और केवल चार-पांच परिवार ही निवास करते हैं। इसके विपरीत, गांव के कई ऐसे हिस्से आज भी अंधेरे में डूबे हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और रात के समय आवागमन में कठिनाई का सामना करते हैं।

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सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक ओर एनटीपीसी प्रबंधन इस पहल को ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्राम प्रधान विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए अलग सूची दी थी, लेकिन सूची के अनुरूप कार्य नहीं किया गया।

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हालांकि एनटीपीसी रिहन्द के प्रतिनिधि रोशन ने बताया कि कार्य ग्राम प्रधान की देखरेख में कराया गया है, लेकिन ग्राम प्रधान के बयान ने पूरे मामले को और उलझा दिया है।अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की जांच कर वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं, ताकि CSR की मंशा वास्तव में धरातल पर दिखाई दे सके।

CSR की चमक पर सवालों का साया

 ग्रामीण बोले- हमें नहीं, खाली सड़क को मिली रोशनी CSR की रोशनी वहां पहुंची जहां अंधेरा कम था, और जहां अंधेरा ज्यादा है वहां लोग अब भी उजाले का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि CSR का उद्देश्य जनहित और जरूरतमंद क्षेत्रों को सुविधा देना है, तो फिर कम आबादी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता क्यों दी गई? आखिर किसके कहने पर लोकेशन बदली गई और किस आधार पर यह निर्णय लिया गया।

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