मनोरमा जनजागृति यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नदी संरक्षण हेतु प्रदेश की सबसे बड़ी एवं लंबी जनजागरण यात्रा 

बस्ती जिले में मनोरमा नदी को स्वच्छ, अविरल एवं अतिक्रमण मुक्त बनाने की मांग को लेकर आयोजित "मनोरमा जनजागृति यात्रा" रविवार को जनसमर्थन के अभूतपूर्व उत्साह के बीच संपन्न हुई।

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बस्ती। बस्ती जिले में मनोरमा नदी को स्वच्छ, अविरल एवं अतिक्रमण मुक्त बनाने की मांग को लेकर आयोजित "मनोरमा जनजागृति यात्रा" रविवार को जनसमर्थन के अभूतपूर्व उत्साह के बीच संपन्न हुई। यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने किया। मखौड़ा धाम से प्रारंभ होकर जिलाधिकारी कार्यालय बस्ती तक लगभग 65 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस यात्रा में हजारों लोगों ने मोटरसाइकिलों एवं अन्य माध्यमों से सहभागिता की।
 
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मखौड़ा धाम में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए श्री पाण्डेय ने मखौड़ा धाम एवं मनोरमा नदी के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल, जीवन का आधार है तथा नदियों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि मनोरमा नदी केवल एक जलधारा नहीं बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन की पहचान है।
 
इसके उपरांत हजारों समर्थकों के साथ मोटरसाइकिल यात्रा के रूप में जनजागरण अभियान प्रारंभ हुआ। यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं व्यापारियों द्वारा यात्रियों का स्वागत किया गया तथा जलपान की व्यवस्था की गई। प्रत्यक्षदर्शियों एवं उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छोटी नदियों की सफाई एवं संरक्षण को समर्पित यह प्रदेश की सबसे बड़ी एवं सबसे लंबी जनजागरण यात्राओं में से एक रही।
 
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर यात्रा से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर मनोरमा नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने, नियमित सफाई कराने तथा नदी पुनर्जीवन के लिए प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की मांग रखी। इस दौरान अधिकारियों के साथ लंबी वार्ता एवं बहस हुई। प्रतिनिधिमंडल को विकास भवन में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वासन दिया गया, किंतु वहां पहुंचने पर अपेक्षित स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता नहीं होने से समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।
श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि नदी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासनिक उदासीनता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जनहित के इस मुद्दे पर प्रशासन का सहयोग अपेक्षित था, किंतु न तो पर्याप्त व्यवस्थाएं दिखाई दीं और न ही जनभावनाओं के अनुरूप तत्परता। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो वह शासन स्तर पर विस्तृत शिकायत एवं सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
 
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं बल्कि समाधान के लिए रचनात्मक सहयोग देना भी है। उन्होंने बताया कि बीते डेढ़ दशक में मनोरमा नदी के संरक्षण के लिए अनेक ज्ञापन, पत्र, धरना-प्रदर्शन एवं सुझाव दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय युवाओं एवं स्वयंसेवकों के सहयोग से विभिन्न घाटों के आसपास लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाकर 1500 कुंतल से अधिक मलबा निकालने का कार्य भी किया गया, किंतु प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
 
श्री पाण्डेय ने कहा कि मनोरमा नदी को पुनर्जीवित करने की लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और जनहित की लड़ाई है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
 
इस अवसर पर शिवचरन जायसवाल, शक्तीदीप पाठक, विमलेन्द्र सिंह, अनुज त्रिपाठी, विनोद चौधरी, अवशेष पाठक, अभिषेक शर्मा, हीरालाल वर्मा, अवधेश वर्मा, रत्नेश श्रीवास्तव, देवशरण शुक्ल, उमानाथ द्विवेदी, राहुल शास्त्री, अतुल शास्त्री, विवेक पाण्डेय, चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, पशुपतिनाथ चौबे, नवीन तिवारी सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रह
 
 
 

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