27 मई को हर गांव में फर्जी एमएसपी आदेश और सी ए सी पी दस्तावेज़ की प्रतियां जलाओ
खाद और डीज़ल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन
बेतिया। बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 27 मई को देशव्यापी संघर्ष के ऐलान का स्वागत किया है।उन्होंने फर्जी एमएसपी, गैस,पेट्रोल– डीजल ,खाद के दामों में हुई वृद्धि का कड़ा विरोध करते हुए डीजल और पेट्रोल पर मोदी सरकार द्वारा ली जा रही 35 प्रति लीटर टैक्स समाप्त करने को कहा है ।संयुक्त किसान मोर्चा ने मोदी सरकार द्वारा किसानों की यूरिया और डीएपी की जरूरत को पूरी न करने की कड़ी निंदा करते हुए बताया कि सरकार को पूरी तरह जानकारी थी कि हर वर्ष इस मौसम में मांग बढ़ती है। फिर भी उसने जानबूझकर विदेश नीति में विफलता दिखाई और सस्ते कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की।जिससे किसानों को डीज़ल और खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार बेशर्मी से ईंधन की कीमतें बढ़ा रही है। किसानों पर बोझ डाल रही है और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रचारित प्राकृतिक खेती से फसल उत्पादन में कम से कम 30% की गिरावट आएगी। कृषि मंत्री ने खुले तौर पर उर्वरकों की कमी की घोषणा कर कालाबाज़ारी को बढ़ावा दिया है। सरकार ने अपनी अक्षमता साबित की है और ईरान तथा रूस से डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर आयात रोकने की राजनीतिक भूल पर भी कोई पछतावा नहीं दिखाया है।संयुक्त किसान मोर्चा ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ तीन मोर्चों पर संघर्ष शुरू करने का निर्णय लिया है। खरीफ 2026-27 की किसान विरोधी न्यूनतम समर्थन मूल्य , पेट्रोल-डीज़ल में 3.90 रुपए प्रति लीटर मूल्य वृद्धि और गंभीर उर्वरक संकट को पैदा कर किसानों के खेती और किसानी पर सुनियोजित हमला बोला है।
आज देश में प्रत्येक दिन 48 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। फिर भी मोदी सरकार कारपोरेट और अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने नतमस्तक होती जा रही है।संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार की इस व्यापार समझौते, टैक्स की लूट और कृत्रिम संकट पैदा कर योजनाबद्ध तरीके से देश के किसानों तथा आम जनता की हत्याओं की सिलसिला की कड़ी निंदा करती है। कपास पर 2357 रुपए प्रति क्विंटल और अरहर पर लगभग 2545 रुपए प्रति क्विंटल की चोरी हो रही है। यह संगठित लूट है।2016 से 2025 के बीच 20 प्रमुख फसलों पर 27 लाख करोड़ रुपए का किसानों को भारी नुकसान हुआ। जो मिल मालिकों, निर्यातकों और बिचौलियों को स्थानांतरित किया गया।
केवल 2025-26 खरीफ में धान, कपास, सोयाबीन और मक्का जैसी चार फसलों से किसानों को 2.64 लाख करोड़ का नुकसान हुआ और यह झूठा एमएसपी साबित हुआ। अक्टूबर 2025 में सोयाबीन एमएसपी से 21% नीचे, मूंग 24% नीचे, मक्का 24% नीचे, मूंगफली 26% नीचे, रागी 35% नीचे और धान 1.8% नीचे बिका। देश की 83% किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य कभी मिलता ही नहीं है।
देश के किसान से प्रति वर्ष 56,500 करोड़ अन्यायपूर्ण टैक्स लिया जाता है । ट्रैक्टरों पर 36 रुपए प्रति लीटर रोड सेस लिया जाता है ।लेकिन उन्हें एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति भी नहीं है।मोदी सरकार अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ के सामने भारत के हितों को गिरवी रख दिया है।असफल विदेश नीति ने सस्ते रूसी तेल और ईरान की मित्रता से भारत को दूर कर दिया है। इससे ऊर्जा संकट और गहरा गया। मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ा दी हैं और किसानों को डीज़ल की बिक्री पर भी पाबंदी लगाई है। ट्रैक्टरों और कृषि कार्यों के लिए डीज़ल पर 36 प्रति लीटर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस 24 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा 15–26 % राज्य वैट हटाकर रियायती दर पर डीज़ल उपलब्ध कराया जाए। सरकार के घाटे की भरपाई भारी लाभ लेने वाले कॉर्पोरेट घरानों से लिया जाय।
संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों को DAP और पोटाश पर 300% अधिक भुगतान के लिए मजबूर किया जा रहा है।पोषक तत्व आधारित सब्सिडी नीति के तहत भाजपा सरकार ने उर्वरक सब्सिडी घटाई है। जिससे पोटाश की कीमत दोगुनी हो गई और यूरिया की कीमत भी बढ़ गई। डी ए पी खाद की कीमत 2014 में 1200 प्रति बोरी से बढ़कर 2026 में 2400 से अधिक हो गई है। पोटाश 2000–2500 प्रति बोरी बिक रहा है और यूरिया लगातार किल्लत बढ़ती जा रही है, जिसके चलते किसानों को 45 किलो की बोरी 500–700 में खरीदनी पड़ रही है। कुछ भाजपा शासित राज्यों में बोनस की घोषणा करते हुए केंद्र सरकार अन्य राज्यों को धान पर एमएसपी बोनस वापस लेने के लिए मजबूर कर रही है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 3100 प्रति क्विंटल पर धान खरीदने का दावा करने वाली केंद्र सरकार अन्य राज्यों पर हमला कर रही है और बोनस वापस लेने की मांग कर रही है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील करके अमेरिका से सस्ती कृषि उपज आयात करने की अनुमति दी जा रही है। जबकि अमेरिका अपने किसानों को हर वर्ष 20 अरब डॉलर की सब्सिडी देता है। भारतीय कृषि, जो पहले ही सरकारी टेक्सों को थोपे जाने के कारण अनुदान रहित उल्टी गिनती का दंश झेल रही है। उसे अमेरिकी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूर करना किसानों के खिलाफ ज्यादती है।
किसान न्याय के चार स्तंभ
1. MSP और खरीद — सी2 + 50% पर कानूनी गारंटी सहित व्यापक खरीददारी। फर्जी एमएसपी आदेश की तुरंत वापसी और सी ए सी पी को दंडित किया जाए।
2. ईंधन और ऊर्जा — पेट्रोल-डीज़ल मूल्य वृद्धि तुरंत वापस लिया जाए और ट्रैक्टरों व कृषि उपयोग के लिए टैक्स-मुक्त डीज़ल उपलब्ध कराया जाए।
3. उर्वरकों की बढ़ी कीमतें घटाया जाय और काला बाज़ारियों पर शख्त कारवाई किया जाए।
4. भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को समाप्त कर एमएसपी पर वर्ल्ड ट्रेड संगठन के दबाव को खारिज किया जाए। राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान हो, बोनस देने वाले राज्यों को दंडित करने के लिए केंद्रीय पूल वापसी जैसी जबरदस्ती बंद किया जाय। जी एस टी कानून में संशोधन कर राज्यों को वर्तमान 31% के बजाय टैक्स और अधिभार सहित 50% हिस्सा दिया जाए। किसानों और कृषि मजदूरों के सभी कर्ज तुरंत माफ किए जाएं।संयुक्त किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि वह सभी महत्वपूर्ण मांगों — सी2+50% की दर से एमएसपी की कानूनी गारंटी, व्यापक कर्ज माफी, बिजली और बीज क्षेत्रों के निजीकरण एवं एकाधिकार का विरोध, तथा किसानों और देश के हितों को नुकसान पहुँचाने वाले मुक्त व्यापार समझौतों के खिलाफ पूरे देश में एकजुट जनसंघर्ष खड़ा करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने 28 जुलाई को नई दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इन बैठकों में सभी महत्वपूर्ण मांगों की प्राप्ति के लिए संयुक्त और स्वतंत्र कार्रवाइयों की आगामी योजना तय की जाएगी।


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