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पांच माह से भूखी हैं सेविका-सहायिका मानदेय
ड्रेस और उत्पीड़न के खिलाफ डीएम कार्यालय पर गरजा आंगनबाड़ी कर्मियों का हुंकार
स्वतंत्र प्रभात | संवाददाता अतुल कुमार
बेतिया। पश्चिम चंपारण में बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन एटक के बैनर तले सेविका और सहायिकाओं का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर जिले भर से पहुंचीं आंगनबाड़ी कर्मियों ने जिला पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय विशाल धरना देकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। धरना स्थल पर महिलाओं की भारी भीड़, हाथों में तख्तियां, नारों की गूंज और अपने हक की लड़ाई लड़ने का संकल्प पूरे आंदोलन को उग्र और प्रभावशाली बना रहा था।
धरना में शामिल सेविका-सहायिकाओं ने आरोप लगाया कि पिछले पांच महीनों से मानदेय भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है। घर चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन चुका है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार एक तरफ बच्चों के पोषण और शिक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं बच्चों की देखभाल करने वाली सेविकाओं को महीनों तक मानदेय से वंचित रखा जा रहा है।
धरना के दौरान सेविकाओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति को भी खुलकर सामने रखा। आरोप लगाया गया कि बच्चों को जो ड्रेस उपलब्ध कराया जा रहा है उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। कपड़े इतने घटिया हैं कि बच्चे उसे पहनने तक से इंकार कर रहे हैं। इससे सरकार की योजनाओं की सच्चाई उजागर हो रही है। सेविकाओं ने कहा कि यदि बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की बात की जाती है तो कम से कम उन्हें सम्मानजनक गुणवत्ता की सामग्री तो उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आंदोलन में गैस आपूर्ति की समस्या भी प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी। सेविकाओं ने कहा कि केंद्रों पर खाना बनाने के लिए गैस की भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। कई जगहों पर समय पर गैस नहीं मिलने से बच्चों का भोजन प्रभावित हो रहा है।
ऐसी स्थिति में सेविकाओं को ही ग्रामीणों और अभिभावकों के सवालों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार योजनाओं की जिम्मेदारी तो तय करती है लेकिन संसाधन उपलब्ध कराने में लगातार विफल साबित हो रही है। धरना के दौरान केंद्र जांच के नाम पर सेविकाओं को प्रताड़ित करने का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर अधिकारियों द्वारा अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और सेविकाओं को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है।आंदोलनकारियों ने मांग की कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और सम्मानजनक हो तथा किसी भी सेविका को अपमानित करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि बाजार में महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन केंद्र संचालन के लिए मिलने वाली राशि पुराने दरों पर ही सीमित है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण सामग्री खरीदना असंभव हो गया है। यूनियन ने मांग उठाई कि वर्तमान बाजार भाव के अनुसार केंद्रों के लिए राशि निर्धारित की जाए ताकि बच्चों को बेहतर पोषण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
धरना के बाद तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति के नेतृत्व में जिला पदाधिकारी से मिला और मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में जिला महासचिव सुमन वर्मा और जिला अध्यक्ष सीमा देवी भी शामिल रहीं। जिला पदाधिकारी ने प्रतिनिधियों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन आंदोलनकारी सेविकाओं ने साफ कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति ने सेविका-सहायिकाओं से अपने हक और अधिकार की लड़ाई को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यूनियन लगातार जिला से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक सेविका-सहायिकाओं की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए सेविका-सहायिकाओं की एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि यूनियन के संघर्ष का ही परिणाम है कि कभी 500 रुपये मिलने वाला मानदेय आज बढ़कर 7000 रुपये तक पहुंचा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में और बड़ा संघर्ष कर सेविका-सहायिकाओं को केरल की तर्ज पर 16000 रुपये मानदेय दिलाने की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी सेविका-सहायिकाओं को संगठित होकर यूनियन को मजबूत बनाना होगा।
सभा को स्नेहलता, गोदावरी देवी, सुमन वर्मा, सीमा देवी, रेणु देवी, सरिता शुक्ल, तब्बसुम आरा, प्रमिला देवी, संजू देवी, संध्या देवी, सत्या देवी, भीखारी महतो, सोमेश्वर शर्मा, आनंद श्रीवास्तव और उदयनारायण शुक्ल समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक सेविका-सहायिकाओं की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना का संचालन अजय वर्मा ने किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान आंदोलनकारी सेविकाओं का उत्साह और आक्रोश दोनों देखने लायक था। डीएम कार्यालय परिसर नारों से गूंजता रहा और सेविका-सहायिकाओं ने साफ संदेश दिया कि अब वे अपने अधिकारों के लिए चुप बैठने वाली नहीं हैं।
जितेंद्र कुमार राजेश


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