अप्रैल में नहीं तो क्या सितंबर–अक्टूबर में होंगे यूपी पंचायत चुनाव? जानें देरी की वजह
मतदाता सूची में देरी बनी बड़ी वजह ओबीसी आयोग का गठन भी बाकी सितंबर–अक्टूबर की चर्चा क्यों
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तारीखों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है, जिसके चलते चुनाव कार्यक्रम आगे खिसकने की संभावना जताई जा रही है। अब अंतिम मतदाता सूची 28 मार्च 2026 को प्रकाशित की जाएगी। पहले यह सूची फरवरी में जारी होनी थी, लेकिन दावे-आपत्तियों की बड़ी संख्या और सत्यापन प्रक्रिया लंबी होने के कारण समय बढ़ाना पड़ा।
इस देरी के चलते पंचायत चुनाव अप्रैल–मई में कराना मुश्किल माना जा रहा है। वहीं, ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण भी चुनाव सितंबर–अक्टूबर तक टलने की अटकलें तेज हो गई हैं।
मतदाता सूची में देरी बनी बड़ी वजह
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान 2025-26 के तहत लाखों दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं। इनके निस्तारण, डुप्लीकेट नामों की जांच, दस्तावेज सत्यापन और पांडुलिपियों को अंतिम रूप देने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
18 दिसंबर 2025 को जारी प्रारंभिक सूची में पिछले चुनाव की तुलना में करीब 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े थे। 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की गई और 6 फरवरी तक दावे-आपत्तियां मांगी गईं। बड़ी संख्या में आवेदन मिलने के कारण अंतिम सूची की तारीख बढ़ाकर 28 मार्च कर दी गई।
ओबीसी आयोग का गठन भी बाकी
पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग का गठन होना जरूरी है। अभी तक आयोग का गठन नहीं हो सका है। आयोग बनने के बाद जिलावार ओबीसी आबादी का सर्वे, आंकड़ों का विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 3 महीने से लेकर 6 महीने तक का समय लग सकता है।
ऐसी स्थिति में अप्रैल–मई में चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है और चुनाव कार्यक्रम आगे खिसक सकता है।
Read More ढाई साल की बेटी संग की दरिंदगी, मां ने चुपके से बना लिया वीडियो; हैरान कर देगी हैवान बाप की करतूतअंतिम सूची के बाद भी लगेगा समय
आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 21 फरवरी से 16 मार्च तक पूरक सूचियों का कंप्यूटरीकरण और मतदान केंद्रों का निर्धारण होगा। इसके बाद 17 से 27 मार्च तक मतदान केंद्रों का क्रमांकन, मैपिंग और मतदाता क्रमांक तय किए जाएंगे।
28 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी आपत्तियों के निस्तारण में करीब एक महीना लग सकता है। इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है।
सितंबर–अक्टूबर की चर्चा क्यों
मतदाता सूची में देरी और ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया लंबित होने के कारण पंचायत चुनाव अप्रैल या मई के बजाय सितंबर–अक्टूबर तक टलने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों की धीमी रफ्तार को देखते हुए चुनाव आगे खिसकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल अंतिम मतदाता सूची जारी होने और ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायत चुनाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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