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शिव पुराण की महिमा सुन श्रद्धालु हुए भाव -विभोर
सिद्धार्थनगर। उसका बाजार कस्बा के प्राचीन शिव मंदिर पर चल रहे 9 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा में भगवान शिव के श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने पहुंचे। कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल जी महाराज ने पंचाक्षर मंत्र की महिमा और भस्म की महिमा का बखान किया। उन्होंने बताया कि इस मंत्र के जब से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के समस्त पापों का हरण कर लेते हैं। उन्होंने पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय को वेदों का कर्म बताया और कहा कि पंचाक्षरी मंत्र के पांचो अक्षर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस मंत्र के जब से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, पापों का नाश और शिव की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस मंत्र के नियमित जाप से जीवन में स्थिरता सफलता और आध्यात्मिकता आता है।उन्होंने कहा कि भगवान शिव की पूजा के लिए मूर्ति से अधिक फलदाई शिवलिंग का पूजन है। शिवलिंग की स्थापना स्वयं करना या दूसरों से करवाना उत्तम फल देता है। भगवान शंकर ही ऐसे देवता हैं। जो मूर्ति व लिंग के रूप में पूजे जाते हैं। भस्म की महिमा बताते हुए कथावाचक ने कहा की भस्म शिव का प्रसाद और पवित्रता का प्रतीक है। जो नश्वरता का बोध कराता है।
भस्म को शिव की पूजा में अत्यंत महत्व दिया गया है। यह शरीर की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक है। शिव महापुराण के अनुसार भस्म को धारण करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है। भस्म को विभूति भी कहा जाता है हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। यह भगवान शिव का प्रिय आभूषण है और नश्वरता एवं वैराग्य का प्रतीक है। भस्म को भगवान शिव को अर्पित करना अत्यंत कल्याणकारी है। भस्म का धारण करना अग्नि स्नान के समान है। जो शरीर के साथ-साथ मन को भी शुद्ध करती है। मौके पर प्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचिका प्राची शुक्ला, भजन गायिका रेनू शर्मा, अनूप छापड़िया, शिव जायसवाल, सत्य प्रकाश वर्मा, दिलीप मिश्र, फूल कुमार , राकेश आर्या, दीन दयाल जायसवाल, रजत जायसवाल, सुनील, अशर्फी, प्रह्लाद अग्रहरी आदि रहे।

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