पीओसीटी पर आयकर विभाग का शिकंजा, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत के सबूत

आयकर जांच में कई अफसरों को पोओसीटी की ओर से उपकृत करने के मिले सुराग मिलीभगत के गंभीर आरोप

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 राजधानी स्थित आयकर विभाग की जांच इकाई के साथ छापे की रिपोर्ट होगी साझा जल्द हो सकता है बड़ा खुलासा

लखनऊ।

प्रदेश में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई करने वाली कंपनी पीओसीटी साइंस हाउस प्राइवेट लिमिटेड आयकर विभाग की जांच के दायरे में है। कंपनी के ट्रांसपोर्टनगर और गोमतीनगर स्थित ठिकानों पर हाल ही में पड़े छापों में स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े अफसरों से मिलीभगत के चौंकाने वाले सबूत सामने आए हैं।

छापे में बरामद हुए अहम दस्तावेज़

जांच टीम को छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और बाबुओं को कमीशन दिए जाने का स्पष्ट उल्लेख है। सूत्रों के अनुसार, कच्चे बही-खातों में कोडवर्ड का इस्तेमाल कर अफसरों के नाम दर्ज किए गए हैं और उनके आगे लाखों रुपये के भुगतान का जिक्र है।

इसके अलावा, कंपनी संचालक सौरभ गर्ग के गोमतीनगर स्थित आवास से एम्स और कई अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों में करोड़ों रुपये की मेडिकल सप्लाई के रिकॉर्ड, साथ ही डायग्नोस्टिक और पैथोलॉजी सेवाओं से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

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 उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के दो बार के महा निदेशक रहे डॉ के के गुप्ता और क्रय विभाग ने लंबे समय तक तैनात एक बाबू शातिर सौरभ गर्ग का फाइनेंसर और पार्टनर बताया जाता है और 2008 से उपकरण घोटाले का मास्टर माइंड है l  उत्तर प्रदेश स्वास्थ विभाग के महानिदेशक डॉ सुनील श्रीवास्तव के समय से शुरू हुआ पैथालॉजी उपकरण और रिजेंट घोटाला एक लाख करोड़ रुपए से ऊपर का बताया जा रहा है जो लगातार जारी है l  इस लूट की गंगा में डुबकी लगाने वाले उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष अमित मोहन प्रसाद और प्रबंध निदेशक कंचन वर्मा भी नाम सामनेने आ रहा है जिन्होंने सौरभ गर्ग की ब्लैक लिस्टेड कंपनी को करोड़ों के ठेके दिए और घटिया चीनी उपकरण खरीदे और पूरे प्रदेश की जनता को मौत के मोहन में धकेल दिया गया

 

तीन दिन तक चली छानबीन

भोपाल से आई आयकर विभाग की टीम तीन दिन तक छापेमारी स्थल पर डटी रही। दस्तावेज़ों की गहन जांच-पड़ताल के बाद उन्हें अपने कब्जे में ले लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बरामदगी का पूरा ब्योरा फिलहाल साझा नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट को जल्द ही लखनऊ स्थित जांच इकाई को सौंपा जाएगा।

बड़ी कार्रवाई की आशंका

आयकर विभाग को शक है कि कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों को मोटी रकम देकर सप्लाई ऑर्डर हासिल किए। ऐसे में आने वाले दिनों में उन सरकारी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिन्होंने पीओसीटी से उगाही की। सूत्र बताते हैं कि छापेमारी में बरामद दस्तावेज़ बेहद अहम हैं और इनके आधार पर सिर्फ यूपी बल्कि अन्य राज्यों में भी जांच का दायरा बढ़ सकता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही बड़ा खुलासा किया जा सकता है।

 

 

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