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पीपीसीबी ने स्कूली बच्चों को प्लास्टिक वेस्ट चैंपियन बनाने के उद्देश्य से शुरू किया “पंजाब प्लास्टिक चैंपियंस कार्यक्रम”
पटियाला के बच्चे इस कार्यक्रम को सफल बनाते हैं, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
पटियाला- प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्रोत स्तर पर इसके पृथक्करण एवं संग्रह की प्रक्रिया को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने आज सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऑफ एमिनेंस, फीलखाना, पटियाला में “पंजाब प्लास्टिक चैंपियंस कार्यक्रम” की शुरुआत की।
उद्घाटन के अवसर पर पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा कि यह पहल केवल एक प्रतियोगिता या दो सप्ताह चलने वाला संग्रह अभियान बनकर नहीं रहनी चाहिए। यह एक प्रमुख मॉडल पहल है, जिसके माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि सार्थक पर्यावरणीय व्यवहार में बदलाव की शुरुआत स्कूलों से हो सकती है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों और स्कूलों के उत्साह की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि यदि पटियाला के बच्चे इस कार्यक्रम को सफल बनाते हैं, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम स्कूल आधारित एमएलपी (मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक) वेस्ट संग्रह प्रतियोगिता के रूप में चलाया जा रहा है। यह पहल स्कूलों और विद्यार्थियों को प्लास्टिक कचरे की कठिन श्रेणियों में से एक के प्रबंधन के प्रयासों से जोड़ती है। एमएलपी और अन्य लचीली प्लास्टिक पैकेजिंग, जैसे चिप्स व स्नैक पैकेट, बिस्कुट व कन्फेक्शनरी रैपर, नूडल्स पैकेट, सैशे तथा इसी प्रकार की अन्य पैकेजिंग की रीसाइक्लिंग वैल्यू अक्सर सीमित होती है। इसलिए बोतलों और अन्य उच्च-मूल्य वाले प्लास्टिक की तुलना में इनके पुनर्प्राप्ति के अवसर कम होते हैं। जब यह सामग्री सामान्य कचरे के साथ मिल जाती है, तो अंततः लैंडफिल पर कचरे का बोझ बढ़ता है।
इस पहल को केवल अल्पकालिक संग्रह अभियान के बजाय बच्चों में छोटी उम्र से ही कचरे के पृथक्करण और जिम्मेदार वेस्ट मैनेजमेंट की आदतें विकसित करने के प्रयास के रूप में तैयार किया गया है। विद्यार्थियों को प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूक किया जाएगा तथा उन्हें घरों में उत्पन्न होने वाले एमएलपी कचरे को एकत्र करने, उसे साफ और सूखा रखने तथा स्कूलों में रखे निर्धारित संग्रह बॉक्स में जमा करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पीपीसीबी एकत्रित सामग्री की उचित प्रोसेसिंग और उसे लैंडफिल से हटाकर उचित प्रबंधन एवं रिकवरी के लिए भेजने की व्यवस्था करेगा।
यह कार्यक्रम पंजाब प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सोसाइटी और स्थानीय गैर-सरकारी संस्था मेरा पटियाला मैं ही सवारां के सहयोग से लागू किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में 20 से अधिक स्कूलों के प्रतिनिधियों, जिनमें एनएसएस, ईको-क्लब कोऑर्डिनेटर, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल थे, ने भाग लिया।
इस अवसर पर जिला शिक्षा विभाग, पटियाला की ओर से भी सक्रिय सहयोग दिया गया। इसमें डॉ. रविंदर पाल सिंह, डिप्टी डीईओ, पटियाला भी शामिल रहे। जिन स्कूलों में फिलहाल एनएसएस या ईको-क्लब नहीं हैं, उन्हें भी विद्यार्थी-नेतृत्व वाले ऐसे पर्यावरणीय समूह स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि स्कूल परिसरों में पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी पहलों में निरंतर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
पहले चरण का समापन दो सप्ताह की स्कूल-स्तरीय संग्रह प्रतियोगिता के साथ होगा। इसके बाद एकत्रित सामग्री का संग्रह और मात्रा निर्धारण किया जाएगा। दूसरे चरण में कार्यक्रम को स्कूलों के एक और समूह तक विस्तारित किया जाएगा, जिसका तत्काल लक्ष्य पटियाला के लगभग 50 स्कूलों को इसमें शामिल करना है।उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली पीपीसीबी की राज्य स्तरीय प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस में सम्मानित किया जाएगा। पटियाला में चलाया जा रहा यह स्कूल कार्यक्रम पंजाब भर में व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले मॉडल के रूप में भी प्रस्तुत किया जाएगा।
शुरुआती समारोह में महाराष्ट्र की सफाई बैंक पहल से जुड़े और इसकी शुरुआती अगुवाई करने वाले श्री ऋषि अग्रवाल भी शामिल हुए। इसी पहल से वर्तमान स्कूल-आधारित मॉडल को प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम में युवा पर्यावरणविद् और कंटेंट क्रिएटर दमनजोत कौर ने भी भाग लिया, जो स्थिरता, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।दोनों वक्ताओं ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए। पंजाब भर के स्कूलों के लिए पीपीसीबी का संदेश स्पष्ट है कि “प्लास्टिक चैंपियंस” अभियान की शुरुआत पटियाला से हो चुकी है और इसमें शामिल होने के लिए अन्य स्कूलों का स्वागत है।


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