पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल की 45 करोड़ की जमीन भी फर्जीवाड़े की भेंट, फर्जी पैन-आईडी से हुई थी रजिस्ट्री

सिसेंडी के पुराने भूमि घोटाले फिर चर्चा में, 2012-13 की विवादित रजिस्ट्रियां निरस्त होने के बाद दोबारा जांच की तैयारी; इंस्पेक्टर बोले- वर्तमान प्रकरण से कड़ियां मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई !

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लखनऊ/संवाददाता।
 
 
मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के सिसेंडी में हाल ही में उजागर हुए भूमि फर्जीवाड़े के मामले के बाद वर्ष 2012-13 के पुराने जमीन घोटाले एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। सामने आए तथ्यों के अनुसार जालसाजों ने मध्य प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय श्यामाचरण शुक्ल की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि तक को नहीं छोड़ा। आरोप है कि फर्जी पैन कार्ड और फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनवाकर एक व्यक्ति को श्यामाचरण शुक्ल बताकर करीब 21 बीघा भूमि की रजिस्ट्री 2 अप्रैल 2012 को करा दी गई थी। वर्तमान में इस भूमि की कीमत करीब 45 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
 
जानकारी के अनुसार सिसेंडी स्थित उक्त भूमि की रजिस्ट्री तेनवा भादुड़ी (बलिया) निवासी राजेश कुमार भारद्वाज और राकेश कुमार भारद्वाज के नाम कराई गई थी। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस न तो फर्जी व्यक्ति तक पहुंच सकी और न ही खरीदारों की गिरफ्तारी हो सकी। बाद में 13 अक्टूबर 2013 को अंतिम रिपोर्ट लगाकर प्रकरण बंद कर दिया गया। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा मामला होने के कारण तत्कालीन विधायक की शिकायत पर जांच कराई गई, जिसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद विवादित रजिस्ट्री निरस्त कर भूमि का नामांतरण वैध वारिसों के नाम दर्ज कर दिया गया।
 
 
 
                                              *फर्जी पहचान बनाकर सरोज कुमार की जमीन भी बेची गई*......
 
इसी अवधि में सुरेश कुमार के भाई सरोज कुमार की भूमि भी कथित रूप से इसी गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिए जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि फर्जी सरोज कुमार तैयार कर उनके नाम से पैन कार्ड और पहचान पत्र बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर गाटा संख्या 1237 (रकबा 1.328 हेक्टेयर) समेत अन्य भूमि की रजिस्ट्री 2 मार्च 2013 को महज 25 लाख रुपये में राजेश कुमार भारद्वाज और राकेश कुमार भारद्वाज के नाम कर दी गई, जबकि उस समय भूमि की बाजार कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई थी। फर्जी पैन कार्ड सिसेंडी के पते पर प्राप्त भी कराया गया, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि दस्तावेज किसने प्राप्त किए थे।
 
 
 
*लेखपाल की रिपोर्ट से खुला था पूरा खेल*......
 
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन लेखपाल बुम्हादीन ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध मानते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद जांच शुरू हुई और दोनों विवादित रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी गईं। बताया जाता है कि आज तक सरोज कुमार का कोई वैध वारिस सामने नहीं आया है, जिसके चलते संबंधित भूमि अब भी उनके नाम दर्ज है और वर्षों से बिना उपयोग के पड़ी हुई है।
 
हाल ही में सिसेंडी में सामने आए नए भूमि फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद वर्ष 2012-13 के इन मामलों की भी निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की जमीनों की रजिस्ट्रियां हुईं, तो मुख्य साजिशकर्ता अब तक कानून के शिकंजे से बाहर कैसे हैं।
 
 
                                           *फर्जीवाड़े पर क्या बोले मोहनलालगंज कोतवाल*......
 
इंस्पेक्टर, मोहनलालगंज ने राम बाबू सिंह ने बताया कि "सिसेंडी के पुराने भूमि फर्जीवाड़े के मामलों की भी जांच कराई जाएगी। यदि वर्तमान प्रकरण से इन मामलों की कड़ियां जुड़ती हैं तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।"
 
 
 
 

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