तनावमुक्त पुलिसिंग की ओर बढ़ता कदम

राजयोग मेडिटेशन और मेंटल हेल्थ प्रशिक्षण से पुलिस कर्मियों में जागा नया आत्मविश्वास

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स्वतंत्र प्रभात | संवाददाता अतुल कुमार

बेतिया। 23 मई शनिवार को अपर पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना के निर्देशन एवं बेतिया पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार पुलिस लाइन, बेतिया में 21, 22 एवं 23 मई को तीन दिवसीय "मेंटल हेल्थ एवं राजयोग मेडिटेशन" विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पुलिस लाइन के 232 कैनिडेट्स एवं पुलिस कर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर मानसिक सशक्तिकरण, तनावमुक्त जीवन एवं सकारात्मक सोच की कला को आत्मसात किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस कर्मियों को बढ़ते मानसिक दबाव, कार्य तनाव एवं दैनिक चुनौतियों के बीच आत्मिक शांति, संतुलन एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना था। तीन दिनों तक चले इस आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी सत्र में ब्रह्माकुमारी संस्थान के वक्ताओं ने जीवन प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य एवं राजयोग मेडिटेशन के गहन रहस्यों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर "ब्रह्माकुमारी पुष्पा" बहन जी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मन को शांत और स्थिर रखना अत्यंत आवश्यक है।तनावमुक्त पुलिसिंग की ओर बढ़ता कदम उन्होंने बताया कि राजयोग मेडिटेशन केवल ध्यान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है, जो व्यक्ति को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास एवं आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जब मन सकारात्मक होता है तो कठिन परिस्थितियों में भी निर्णय क्षमता मजबूत रहती है और जीवन में संतुलन बना रहता है।"ब्रह्माकुमार गौरव भाई जी" ने सभी उपस्थित पुलिस कर्मियों को डीप मेडिटेशन की विशेष अनुभूति कराई। मेडिटेशन के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने गहन शांति, आत्मिक ऊर्जा एवं मानसिक हल्केपन का अनुभव किया। कई पुलिस कर्मियों ने बताया कि मेडिटेशन के पश्चात उनके अंदर नई ऊर्जा, आत्मबल एवं तनावमुक्ति की अनुभूति हुई। वहीं ब्रह्माकुमार राकेश भाई जी ने शारीरिक योग एवं मानसिक योग के समन्वय पर विशेष सत्र लेते हुए बताया कि केवल शरीर को स्वस्थ रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन का स्वस्थ एवं सकारात्मक होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने योग अभ्यासों के माध्यम से बताया कि जब शरीर और मन दोनों का संतुलन बनता है, तभी व्यक्ति वास्तविक सुख, शांति और कार्यक्षमता का अनुभव करता है।

उनके द्वारा कराए गए योग एवं मानसिक एकाग्रता अभ्यासों से सभी प्रतिभागियों ने अलग-अलग सकारात्मक अनुभूतियां प्राप्त कीं। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान आरक्षित अधीक्षक देवानंद रावत ने कहा पुलिस कर्मियों में अनुशासन, उत्साह एवं आत्मिक जागरूकता का विशेष वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम पुलिस बल को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे तथा भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।

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यह कार्यक्रम पुलिस विभाग एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयास का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और आत्मिक शांति आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर पुलिस कर्मियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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