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सोनभद्र दिव्यांग दंपत्ति के आशियाने पर भू-माफिया की नज़र, 28 साल बाद 8 लाख की मांग उत्तम दिव्यांग सेवा संस्थान ने खोला मोर्चा
दिव्यांग दंपत्ति के आशियाने पर दबंगई का साया, 28 साल बाद मांगा जा रहा 8 लाख का गुंड टैक्स
ब्यूरो रिपोर्ट
ओबरा (बिल्ली मारकुंडी) / सोनभद्र-
जनपद सोनभद्र के बिल्ली रेलवे स्टेशन क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक निर्धन और शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) दंपत्ति, जो पिछले 28 वर्षों से अपने घर में रह रहे हैं, आज भू-माफियाओं की प्रताड़ना के कारण बेघर होने की कगार पर हैं। इस अन्याय के खिलाफ अब सामाजिक संगठनों ने भी हुंकार भर दी है। प्रार्थी रामपुजन विश्वकर्मा के अनुसार, उनके पिता राजेंद्र विश्वकर्मा ने वर्ष 1998 में स्थानीय निवासी स्वर्गीय रवि मल्होत्रा से ₹20,000 नकद देकर जमीन खरीदी थी। स्वर्गीय मल्होत्रा ने तब आश्वासन दिया था कि अभी घर बना लो, रजिस्ट्री बाद में करा देंगे।
वर्षों तक टालमटोल के बाद 2004 में रवि मल्होत्रा का निधन हो गया। अब उनके पुत्र राहुल मल्होत्रा ने वसीयत के आधार पर जमीन अपने नाम कराकर प्रार्थी से ₹8,00,000 की अवैध मांग शुरू कर दी है। रामपुजन और उनकी पत्नी दोनों पैरों से पूर्णत दिव्यांग हैं। आरोप है कि जब उन्होंने अपनी आर्थिक लाचारी बताई, तो राहुल मल्होत्रा ने संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए कहा सड़क किनारे जाकर भीख मांगो।
Read More गोआश्रय केंद्र मऊखुर्द का एडीसीओ सदर ने किया निरीक्षण, भूसे व चारे की मिली पर्याप्त व्यवस्थाप्रार्थी का आरोप है कि उन्हें लगातार घर से बेदखल करने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे परिवार गहरे मानसिक तनाव में है। इस मामले को लेकर उत्तम दिव्यांग सेवा संस्थान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संस्थान के संस्थापक उत्तम सिंह के नेतृत्व में दर्जनों सदस्यों ने ओबरा तहसील में समाधान दिवस के अवसर पर एडीएम (ADM) को ज्ञापन सौंपा। संस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष शिव पूजन विश्वकर्मा की अगुवाई में यह मांग उठाई गई।

न्याय की इस लड़ाई में संतोष कुमार, भुनेश्वर देवगन, आलोक कुमार, नीतू कुमारी, नवीन प्रजापति सहित संस्था के अनेक सदस्य मौजूद रहे। उत्तम दिव्यांग सेवा संस्थान ने स्पष्ट कहा कि 28 वर्षों से रह रहे दिव्यांग परिवार को भू-माफियाओं के चंगुल से बचाना प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
जमीन विवाद की जांच कर प्रार्थी के नाम बैनामा और म्यूटेशन सुनिश्चित हो। धमकियां देने वालों पर कानूनी कार्रवाई कर दिव्यांग परिवार को पुलिस सुरक्षा दी जाए। प्रार्थी की निर्धनता देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील उपलब्ध कराया जाए।
पीड़ित परिवार को इसी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिले। एक ओर सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र का यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी और ओबरा प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे इस दिव्यांग दंपत्ति को न्याय दिला पाएंगे या दबंगई की जीत होगी।


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