गंगा एक्सप्रेस-वे: 12 शहर, 36 हजार करोड़ का खर्च

गंगा एक्सप्रेस-वे का विचार पहली बार 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से प्रस्तावित किया गया था

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उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है। नोएडा और आगरा के बीच बने एक्सप्रेस-वे के बाद से राज्य में अब तक पांच एक्सप्रेस-वे अस्तित्व में आ चुके हैं। अब 29 अप्रैल यानी आज (बुधवार) उत्तर प्रदेश में छठवें एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के नए-नवेले गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया। 594 किलोमीटर लंबे इस ई-वे को यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता के रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर गंगा एक्सप्रेस-वे की जरूरत और इसके निर्माण से जुड़ा इतिहास क्या है? इस एक्सप्रेस-वे की क्या-क्या खासियतें हैं? इसका आर्थिक और राजनीतिक महत्व कितना ज्यादा है? आइये जानते हैं... गंगा एक्सप्रेस-वे की नींव योगी सरकार के कार्यकाल में 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से रखी गई थी। हालांकि, इसकी परिकल्पना और जरूरत को लेकर पहली बार चर्चाएं 2000 के दशक में ही शुरू हो गई थीं।

गंगा एक्सप्रेस-वे का विचार पहली बार 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से प्रस्तावित किया गया था। इसे शुरुआत में 'ग्रेटर नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे' के तौर पर पहचान मिली। हालांकि, गंगा नदी के किनारे इसकी निर्माण योजना होने की वजह से इसे पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां नहीं मिल पाईं और यह परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अगले करीब 12 साल तक इस प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा तक नहीं हुई। इस बीच राज्य में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने नोएडा-आगरा एक्सप्रेस-वे को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया।

29 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को पुनर्जीवित किया। पर्यावरण के मानकों को पूरा करने के लिए, नए एक्सप्रेस-वे को गंगा नदी से 10 किलोमीटर की दूरी पर लगभग समानांतर बनाने की योजना तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) को दी गई। साल 2020 में चरण-1 (मेरठ से प्रयागराज) के निर्माण के लिए दो हजार करोड़ रुपये का पहला बजट आवंटित किया गया। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया। अगस्त 2021 तक 90% से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया।

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नवंबर 2021 में इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल गई और यूपी कैबिनेट ने इसके लिए 36,230 करोड़ का बजट स्वीकृत किया। 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी। एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट को डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर 12 पैकेजों में बांटा गया, जिसका ठेका अदाणी एंटरप्राइजेज और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की कंपनियों को दिया गया।

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जनवरी 2025 में, एक्सप्रेस-वे के दूसरे चरण को भी मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत मेरठ से हरिद्वार (अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे) और प्रयागराज से बलिया तक इसका विस्तार किया जाना है।मार्च 2026 तक पहले चरण में 594 किमी लंबे मुख्य एक्सप्रेस-वे का लगभग 96% काम पूरा हो गया। इसमें मुख्य कैरिजवे का पूरा काम और सभी 1,498 संरचनाओं (पुलों आदि) का निर्माण शामिल रहा। अप्रैल आते-आते इसके सफल ट्रायल रन (परीक्षण) भी पूरे कर लिए गए। अब यह छह लेन एक्सप्रेस-वे पूरी तरह तैयार है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल 2026 को हरदोई के सलेमपुर में इसका भव्य उद्घाटन करेंगे। इंजीनियरों के मुताबिक, यह एक्सप्रेस-वे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ लेन तक विस्तार करने लायक बनाया गया है।

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 लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में 14 लंबे पुल, जिसमें हापुड़ में गंगा नदी पर 900 मीटर और बदायूं में रामगंगा पर 720 मीटर लंबा पुल शामिल हैं। इसके अलावा सात रेलवे ओवरब्रिज, 32 फ्लाईओवर और 453 अंडरपास शामिल हैं। वाहन चालकों की नींद और थकान दूर करने के लिए किनारे पर रंबल स्ट्रिप्स लगाई गई हैं, जो कंपन पैदा कर चालकों को सचेत करेंगी और हादसों का खतरा कम करेंगी।

वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। निगरानी-सुरक्षा के लिए पूरे एक्सप्रेस-वे पर सीसीटीवी और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित किया गया है। रास्ते में यात्रियों के लिए विश्राम स्थल, भोजनालय, पेट्रोल पंप और आपात स्थिति के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

इसके दोनों ओर गंगा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिसमें आईटी पार्क, फार्मा पार्क और टेक्सटाइल पार्क बनेंगे, जिससे रोजगार और व्यापार को भारी बढ़ावा मिलेगा।दावा किया जा रहा है कि इसके शुरू होने से देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55% से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी।

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