अकबरपुर नवीन मंडी प्रशासन की लापरवाही से सांस लेना हुआ दूभर

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हरी हरी मण्डी, कचरों से भरी मण्डी:

​अम्बेडकर नगर।

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सरकारी कागजों पर "ग्रीन मण्डी क्लीन मण्डी" का नारा बुलंद करने वाले महकमे की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो अकबरपुर नवीन मंडी का रुख किया जा सकता है। यह मंडी अपने स्लोगन को पूरी तरह धता बताती नजर आ रही है। मंडी का हाल हमेशा से ही बदतर रहा है, लेकिन हाल ही में हुई हल्की फुल्की बारिश की छींटों ने स्थिति को नारकीय बना दिया है। अब यहां पर आने वाले लोगों के लिए पैदल चलना और सांस लेना दोनों दुश्वार हो चुका है।

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कार्यालय चमका, व्यापारी और ग्राहक बदबू में डूबे

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नवीन ​मंडी स्थल अकबरपुर परिसर के भीतर का नजारा बेहद हैरान करने वाला है। केवल प्रशासनिक कार्यालय क्षेत्र को छोड़ दिया जाए— जहां अधिकारी बैठते हैं— तो बाकी पूरा परिसर गंदगी का ढेर बन चुका है।

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सड़ती सब्जियां और फल: जहां व्यापारियों और ग्राहकों का सबसे ज्यादा जमावड़ा लगता है, वहां आलू, टमाटर और अन्य मौसमी सब्जियां सड़कर भयानक बदबू फैला रही हैं।

सड़े फलों का अंबार: कई कोनों में यहां तक कि बीच सड़क पर सड़े हुए फलों के अवशेषों का ढेर लगा है, जिससे उठने वाली दुर्गन्ध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

एसी कमरों से बाहर नहीं निकलते जिम्मेदार

​सबसे ज्यादा आक्रोश मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये को लेकर है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि मंडी सचिव और निरीक्षकों को अपने वातानुकूलित (एसी) कमरों से बाहर निकलकर इस बदहाली को देखने का न तो समय है और न ही कोई परवाह।

व्यापारियों का दर्द: "अधिकारियों को जनता की सहूलियत से कोई सरोकार नहीं है। उनका वेतन तो हर महीने समय पर आ ही जाता है, फिर चाहे मंडी नरक में तब्दील हो जाए या महामारी का केंद्र बने, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।" फिलहाल कोई भी व्यापारी अधिकारियों की कार्यवाही के भय से कैमरे के सामने बोलने की हिम्मत न जुटा सका।

होगी कार्यवाही या हावी होगी लोगों पर मजबूरी

इस भीषण गंदगी के कारण नवीन मण्डी में न सिर्फ संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या पर भी असर पड़ रहा है। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस घोर लापरवाही का संज्ञान लेते हैं या व्यापारी और आम जनता इसी तरह सड़न और बदबू के बीच काम करने को मजबूर रहेंगे।

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