आस्था  लगाकर आते हैं दर्शनार्थ दुर्व्यवस्था के होते हैं शिकार सिर्फ होता है  दर्शनार्थियों का मंदिर परिसर में शोषण। 

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हलिया मीरजापुर। 

संवाददाता प्रवीण तिवारी

मिर्जापुर। हलिया विकासखंड के सुप्रसिद्ध स्थल गड़बड़ा धाम में अव्यवस्थाओं का जमावड़ा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हर दिन परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। प्रत्येक सोमवार तथा तीज त्योहार व्रत पर्वों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में नवरात्र तथा अगहन महीने में लगने वाले पन्द्रह दिवसीय मेले के मौके पर मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं का दंश झेलना मजबूरी होगी।

 

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क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आस्था के केंद्र बिंदु गड़बड़ा धाम मंदिर पर पूजन अर्चन के लिए पहुंचते हैं व्रत पर्वों के दौरान मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ कई गुना बढ़ जाती है क्षेत्र के गड़बड़ा धाम के मंदिर की मौजूदा तस्वीर व्यवस्था का सच बताने के लिए काफी है। जहां मंदिर परिसर में ही कुछ लोगों द्वारा मनमानी तरीके से मूर्तियां स्थापित करके मंदिर परिसर में अव्यवस्थाओं का जाल फैलाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे मंदिर  में आने वाले श्रद्धालुओं को

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समस्याओं जूझना पड़ेगा। दूसरी ओर सेवटी नदी पर निर्मित पुलिया क्षतिग्रस्त है जिसे आज तक दुरुस्त नहीं कराया जा सका है उसके बदले में अस्थाई पुलिया बनाई गई है जो बराबर क्षतिग्रस्त होती रहती है और उसके मरम्मत के नाम पर विभाग द्वारा मनमानी रकम भी डकार ली जाती है। और व्यवस्था जस की तस बनी रहती है। और यही व्यवस्था लगातार दुर्घटनाओं को दावत भी दे रही है। धाम में दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आज तक वाहन स्टैंड की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। नवरात्र तथा अगहन महीने में लगने वाले पन्द्रह दिवसीय मेले में दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ वाहन स्टैंड के नाम पर भी जमकर मनमानी वसूली की जाती है। और पुलिस प्रशासन

 

एकदम चुप्पी साधे रहती है। नाली निर्माण व्यवस्थित न होने के कारण बरसात के महीने में मंदिर के आसपास पानी जमा हो जाता है जिससे सड़न और दुर्गंध फैल जाती है तथा घुटने भर गंदगीयुक्त पानी में होकर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच पाते हैं। मेला क्षेत्र में न तो कोई यात्री शेड है और न ही कोई धर्मशाला यहां तक कि मंदिर के आसपास स्वच्छ पेयजल, शौचालय तथा साफ सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बुनियादी सुविधाओं के लिए ऊंचे दाम वसूले जाते हैं लेकिन प्रशासन इन सबसे अनजान बना हुआ है। पूरी व्यवस्था को हथियाकर चंद लोग जनता को लूट रहे हैं फिर भी प्रशासन मौन है।


चुनाव तक ही सीमित रह जाता है वादा।

शासन प्रशासन को इस मेले  की अनदेखी करता ही है लेकिन जनप्रतिनिधि भी यहां के ग्रामीणों को चुनावी वादा करने के बाद भी नजर नहीं आते। कई नेताओं ने चुनाव के समय मां शीतला के दर्शन पूजन कर व्यवस्था व मंदिर सुंदरीकरण के कई वादे किए लेकिन आज तक स्थिति जस की तस रह गई और जनप्रतिनिधियों के द्वारा दिखाए गए योजनाओं के सपने अब तक गायब ही हैं। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि जब तक इस मंदिर को पर्यटन विभाग द्वारा धार्मिक मानचित्र से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक ऐसे ही श्रद्धालुओं को समस्याओं से जूझना पड़ेगा।



बिगड़ा काम भी बनाती हैं गड़बड़ा धाम वाली शीतला मैया।


मिर्जापुर। जनपद के दक्षिणांचल में स्थित सुरम्य विंध्य पर्वत की श्रृंखलाओं की गोद में बसे हलिया विकासखंड के सुप्रसिद्ध स्थल स्थल गड़बड़ा धाम है। यह अति प्राचीन है। "किंवदंती के अनुसार यहां पर एक टेढ़ी नीम की पेड़ से मां शीतला स्वत प्रकट हुई थी बाद में स्थानीय लोगों से जानकारी लेकर मां गड़बड़ा शीतला देवी का के मंदिर की स्थापना की गई। मान्यता है कि इस मंदिर के कुंड का जल ले जाकर चेचक अथवा इसी प्रकार की अन्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति को यदि स्नान कर दिया जाए तो वह ठीक हो जाता है। इस तरह के लोगों की यहां पर

 

स्वस्थ होने पर दर्शन करने की भीड़ जुड़ती है यहां पर माथा टेकने के लिए न सिर्फ इस जनपद बल्कि प्रयागराज संत रविदास नगर भदोही वाराणसी सोनभद्र चंदौली तथा मध्य प्रदेश के मऊगंज रीवा सीधी सिंगरौली समेत आदि जगहों से श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। प्रत्येक सोमवार तथा शारदीय व वासंतिक  नवरात्र के अलावा अगहन शुक्ल पक्ष में पंद्रह दिनों तक लगातार दर्शन पूजन का सिलसिला चलता रहता है लोग धार्मिक अनुष्ठान के साथ मांगलिक कार्य भी संपन्न करते हैं। मनौती पूरी होने पर यहां पर मुंडन संस्कार आदि होते हैं। यहां पर मनौती मानने वाले रोट व लपसी मां शीतला देवी को चढ़ाते हैं। आस्था के इस केंद्र पर किसी भी तरह की परेशानी हो उससे निजात मिल जाती है।जिससे यह मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है

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