सरकार के आदेश का खुलेआम  किया जा रहा है उल्लंघन। 

प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं नहीं है अधिकारियोंं का कोई भय।

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हलिया मीरजापुर।
प्रवीण तिवारी
 
मीरजापुर।प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठा सवाल  अभी एक बच्चे के लिए 2725 की किताबें खरीदी गई सोचने वाली बात है कि एक गरीब परिवार अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएगा। सवाल यह है कि हलिया ड्रमंडगंज क्षेत्र मे  चल रही प्राइवेट विद्यालयों में। अपनी मनमानी कर रहे हैं जब साफ निर्देश है कि केवल एनसीईआरटी की किताबे ही चलेगी और फीस भी निर्धारित सीमा में होगी
 
तो फिर यह लूट क्यों जो की एनसीईआरटी की बुक जो 45 रुपए से ₹60 में मिलती है वही बुक प्राइवेट विद्यालय में ₹300 से लेकर 400 तक बेची जाती है यह एक प्रकार की लूट है और इस पर अभिभावक भी नहीं सवाल उठाते क्या प्रशासन पर कार्रवाई करेगा या मुंह मोड़ लेगा क्या गरीब बच्चों का पढ़ने का अधिकार सिर्फ कागजों में ही रहेगा यहां तक की अभिभावक प्राइवेट विद्यालयों से दबे कुचले हैं।
 
विद्यालय में उनके बच्चे पढ़ रहे हैं जो विद्यालय से निर्देश दिया जाता है वह अभिभावक कर्ज़ ले या कुछ गिरवी रखें लेकिन बच्चों के पढ़ाई में किसी भी प्रकार का बर्ताव नहीं करते हैं। ऐसे अभिभावकों का प्राइवेट विद्यालयों के द्वारा शोषण किया जा रहा है। जबकि शासन का सीधा निर्देश है कि विद्यालय में एनसीईआरटी की किताबें चलाई जाए जिससे बच्चों के गार्जियनों के ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव न पड़े। लेकिन फिर भी विद्यालय के द्वारा एनसीईआरटी की किताब ना चला कर अभी भी प्राइवेट किताबें बच्चों को दी जा रही है।
 
जिससे अभिभावकों के ऊपर तमाम प्रकार का दबाव बढ़ता जा रहा है  ग्रामीणों का शासन से मांग है कि जो शासन का मनसा है उसी के हिसाब से विद्यालयों में बुक चलाया जाए जिससे गार्जियन बच्चों को कर्ज लेकर न पढ़ सके अपने सीमा तक उनकी पढ़ाई करवाए।

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