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विकास की धड़कन बना असम ब्रह्मपुत्र पर सेतु और अंडरवाटर टनल से बदलती क्षेत्रीय तस्वीर
असम की धरती पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी की जनसभा में भारत माता की जय का उद्घोष किया
असम की धरती पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी की जनसभा में भारत माता की जय का उद्घोष किया, तो वह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि उत्तर–पूर्व के विकास को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश भी था। उनके संबोधन में संगठन की शक्ति, कार्यकर्ताओं के समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की झलक दिखाई दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2014 के बाद उत्तर–पूर्व को प्राथमिकता दी गई है और यह क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। असम, जो लंबे समय तक भौगोलिक दूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पिछड़ा माना जाता था, आज बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए नए युग में प्रवेश कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 6-लेन के आधुनिक पुल कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी को जोड़ता है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है, जो इंजीनियरिंग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बन जाने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर मात्र सात मिनट रह जाएगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। ब्रह्मपुत्र, जो असम की जीवनरेखा है, अब विकास का सेतु बन चुकी है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्षों में उत्तर–पूर्व के 125 से अधिक महान व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र की प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि को राष्ट्रीय मंच पर उचित पहचान मिल रही है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इस भूभाग को अब देश के विकास मानचित्र में प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।
विकास की इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर रेल एवं सड़क टनल को मंजूरी दी है। यह परियोजना गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच बनाई जाएगी। लगभग 15.8 किलोमीटर लंबी यह टनल तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल और महत्वाकांक्षी है। पूरे प्रोजेक्ट, जिसमें अप्रोच रोड और रेलवे ट्रैक भी शामिल हैं, की लंबाई 33.7 किलोमीटर होगी और इस पर लगभग 18,600 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस टनल के बन जाने से वर्तमान में 240 किलोमीटर की दूरी घटकर लगभग 34 किलोमीटर रह जाएगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क भी सुदृढ़ होगा। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपात स्थिति में सेना और आवश्यक संसाधनों की तेजी से आवाजाही संभव हो सकेगी। एक ट्यूब में सिंगल रेल ट्रैक की सुविधा होगी और ट्रेनें बिजली से संचालित होंगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि ट्रेन के गुजरने के दौरान सड़क यातायात नियंत्रित रहेगा। इसमें बैलिस्टिक ट्रैक जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो इसे अत्याधुनिक संरचना बनाता है।
इन परियोजनाओं का महत्व केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है। उत्तर–पूर्व भारत लंबे समय से भौगोलिक अलगाव और सीमित बुनियादी ढांचे के कारण आर्थिक रूप से पीछे रहा है। जब मजबूत पुल, आधुनिक सड़कें और सुरक्षित रेल नेटवर्क तैयार होते हैं, तो वे केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ते, बल्कि संभावनाओं को जोड़ते हैं। इससे उद्योग, कृषि, पर्यटन और छोटे व्यवसायों को नई ऊर्जा मिलती है। असम, जो प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध है, अब बेहतर संपर्क के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सकेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में संगठन की शक्ति और कार्यकर्ताओं के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी जहां भी पहुंची है, वह कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रजीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति होती है। यह संदेश केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरक है।
उत्तर–पूर्व के विकास की यह नई कहानी केवल सरकारी योजनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि विश्वास, संकल्प और क्रियान्वयन का उदाहरण है। असम में बन रहे ये बड़े प्रोजेक्ट इस बात के संकेत हैं कि अब यह क्षेत्र देश के विकास की परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में है। पुल और टनल जैसी संरचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेंगी।
गुवाहाटी की सभा में गूंजा “भारत माता की जय” का उद्घोष केवल एक नारा नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक है जो विकास, एकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश को आगे बढ़ा रही है। असम और पूरा उत्तर-पूर्व अब उस परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, जो बुनियादी ढांचे से लेकर राष्ट्रीय पहचान तक हर स्तर पर दिखाई दे रहा है। यह समय है जब ब्रह्मपुत्र की धारा के साथ विकास की धारा भी समानांतर बह रही है, और उत्तर-पूर्व भारत के उज्ज्वल भविष्य की नई इबारत लिखी जा रही है।
कांतिलाल मांडोत
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