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राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाएगी सरकार, किरेन रिजिजू बोले- बिना सबूत लगाए आरोप राजनीतिक हलचल तेज
स्पीकर के सामने नोटिस दाखिल होगा आगे क्या?
नई दिल्ली।
किरन रिजिजू ने बताया कि सदन में उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में सबूत देने का अनुरोध किया था, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री पर देश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
क्या है मामला?
दरअसल, बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने देश के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है और भारत को “बेचने” जैसी बातें कही थीं। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए भी कुछ गंभीर आरोप लगाए थे।
Read More थाना हरैया कस्बा बना नशा कारोवरी का अड्डा मिली भगत से बिक रहा है गंजा स्मैक पुलिस को मिल रही विटामिनसरकार का कहना है कि ये आरोप तथ्यहीन, निराधार और सदन की मर्यादा के खिलाफ हैं। ऐसे में यह संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।
किरेन रिजिजू का बयान
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा—
“राहुल गांधी ने बिना किसी तर्क, बिना सबूत और बिना पूर्व सूचना के सदन में आरोप लगाए। यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार पर झूठे और भ्रामक आरोप लगाए, जो स्वीकार्य नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी के भाषण में कई असंसदीय शब्दों और गलत बयानों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।
“उन्होंने कहा कि किसी ने इंडिया बेच दिया और किसी ने इंडिया खरीद लिया। यह पूरी तरह गलत और भ्रामक है। इस देश को न कोई बेच सकता है और न कोई खरीद सकता है।”
स्पीकर के सामने नोटिस दाखिल होगा
रिजिजू ने बताया कि वह इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि किसी सांसद द्वारा बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
उन्होंने कहा—
“हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर लगाए गए आरोप भी गंभीर हैं और पूरी तरह निराधार हैं। यह विशेषाधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।”
भाषण से हटाए जाएंगे विवादित अंश
सरकार का दावा है कि राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को संसद की कार्यवाही से हटाया जाएगा, जिनमें असंसदीय शब्दों और गलत आरोपों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें झूठे बयान, तथ्यहीन आरोप और आपत्तिजनक शब्द शामिल हैं।
राजनीतिक हलचल तेज
इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष इसे सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
आगे क्या?
अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम होगी। अध्यक्ष नोटिस पर विचार करने के बाद तय करेंगे कि विशेषाधिकार समिति को मामला भेजा जाए या नहीं। यदि नोटिस स्वीकार होता है, तो राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर संसद में टकराव और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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