SRGI and Bank Of Baroda छात्रवृत्ति निकासी और दस्तावेज हेरफेर बेहद गंभीर का आरोप आप भी जानिए क्या है पूरा मामला

एसआरजीआई व बैंक ऑफ बड़ौदा पर अधिवक्ता ने उठाए गंभीर सवाल

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लखनऊ 


 लखनऊ हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता शिवम मिश्रा ने एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (एसआरजीआई), लखनऊ और बैंक ऑफ बड़ौदा की बीकेटी शाखा पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी और छात्रवृत्ति राशि के गबन का मामला उठाया है। अधिवक्ता शिवम मिश्रा ने मीडिया को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया है कि वर्ष 2018 में उनके साथ बैंकिंग धोखाधड़ी की गई और कॉलेज प्रशासन ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपनी संलिप्तता छिपाने का प्रयास किया।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मिश्रा का कहना है कि वे 10 जनवरी 2018 से 20 दिसंबर 2019 तक न्यायिक हिरासत में थे। इस दौरान 20 अप्रैल 2018 को उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 50 हजार रुपये की निकासी दिखाई गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब वे जेल में बंद थे, तब निकासी प्रपत्र पर हस्ताक्षर कैसे किए गए। उन्होंने इस पूरे मामले में कॉलेज और बैंक अधिकारियों के बीच संभावित सांठगांठ की आशंका जताई है।

अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि एसआरजीआई ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) को भेजे गए पत्र में गिरफ्तारी के स्थान को लेकर भ्रामक जानकारी दी। उनका दावा है कि पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी 9 जनवरी 2018 को कॉलेज परिसर से दर्शाई गई है, जबकि विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र में गिरफ्तारी स्थल “नौवा खेड़ा मंदिर” अंकित किया गया। मिश्रा का कहना है कि यह बदलाव जानबूझकर किया गया ताकि संस्थान की भूमिका को छिपाया जा सके।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने उनके मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र—हाईस्कूल और डिप्लोमा—पिछले दस वर्षों से अधिक समय से रोके हुए हैं तथा उनकी 10वीं की मार्कशीट नष्ट कर दी गई है। उन्होंने इसे “दस्तावेजों की फिरौती” बताते हुए छात्रवृत्ति गबन से जोड़ा है।

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प्रेस विज्ञप्ति में अधिवक्ता ने दावा किया है कि उनके पास पुलिस गिरफ्तारी मेमो, बैंक स्टेटमेंट, जेल हिरासत प्रमाणपत्र और विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र सहित कई दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जांच एजेंसियों या मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं। हालांकि अब तक इन आरोपों के संबंध में किसी औपचारिक पुलिस शिकायत या न्यायालय में दायर याचिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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इस मामले में एसआरजीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा या एकेटीयू की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सार्वजनिक अभिलेखों और समाचार स्रोतों में भी इन विशिष्ट आरोपों की पुष्टि नहीं मिल सकी है।

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कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 465 (जालसाजी), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जिसके लिए विस्तृत जांच की आवश्यकता होगी।

फिलहाल यह मामला आरोपों और दावों तक सीमित है। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। समाचार में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे भी अपडेट किया जाएगा।

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