पंचायत चुनाव 2026 | OBC आयोग के गठन की प्रक्रिया जारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PIL निस्तारित की

आरक्षण का अनुपात तय करना तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न होना शामिल

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उत्तर प्रदेश


 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद कि पंचायत चुनाव कानून के अनुसार कराने के उद्देश्य से ओबीसी आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस मुद्दे से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) निस्तारित की। यह मामला जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ के समक्ष आया था। याचिका वकील मोती लाल यादव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि छह सदस्यीय समर्पित OBC आयोग के गठन का प्रस्ताव पिछले पांच महीने से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल, यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष लंबित है।

याचिका में दलील दी गई कि जब तक ऐसा समर्पित आयोग गठित नहीं किया जाता तब तक राज्य सरकार पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट की शर्तों को पूरा नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने से पहले तीन शर्तों का पालन अनिवार्य है। 

इनमें राज्य स्तर पर एक समर्पित आयोग का गठन कर समकालीन और ठोस अनुभवजन्य सर्वे कराना आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय निकायवार आरक्षण का अनुपात तय करना तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न होना शामिल है।

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 PIL में कहा गया कि यदि आयोग का गठन किए बिना वर्ष 2021 की आरक्षण सूची के आधार पर पंचायत चुनाव कराए जाते हैं तो यह उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होगा। याचिका में यह भी बताया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही आश्वस्त कर चुका है कि अप्रैल से जुलाई, 2026 के बीच प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां समय पर चल रही हैं। हालांकि औपचारिक चुनावी प्रक्रिया तभी शुरू की जा सकेगी जब राज्य सरकार सीटों के आरक्षण को अंतिम रूप दे देगी।

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याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि ओबीसी आयोग के गठन में हो रही देरी के कारण पंचायत चुनाव वर्ष 2027 तक टल सकते हैं। ऐसे में उनका कार्यक्रम विधानसभा चुनावों के साथ जुड़ सकता है। याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई कि हाइकोर्ट मुख्यमंत्री को निर्देश दे कि वे मंत्रिमंडल के प्रमुख के रूप में आयोग गठन के लंबित प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लें। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 11ए(2) का हवाला देते हुए कहा गया था कि ओबीसी सीटों का आरक्षण केवल वैध अनुभवजन्य सर्वे से प्राप्त जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से आयोग गठन की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दिए जाने के बाद हाइकोर्ट ने जनहित याचिका निस्तारित की।

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