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स्वयंभू त्रिलोचन महादेव में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, दो गांवों का झगड़ा सुलझाने की है अनोखी कथा
स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता चरवाहे से जुड़ी रोचक कथा स्कंद पुराण में उल्लेख
जौनपुर।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर त्रिलोचन महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 3 बजे से ही भक्त कतार में लगकर बाबा का जलाभिषेक करते नजर आए। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार दोपहर 12 बजे तक एक लाख से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक कर चुके थे, जबकि रात 8 बजे तक करीब ढाई लाख भक्तों के पहुंचने की संभावना जताई गई। जिला प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता
मंदिर के प्रधान पुजारी सोनू गिरी के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग स्वयंभू और जागृत है। मान्यता है कि यह शिवलिंग पाताल को भेदकर स्वयं प्रकट हुआ था। शिवलिंग में भगवान शिव के नेत्र, नासिका, मुख और कान की आकृति स्पष्ट दिखाई देती है, जो इसे विशेष बनाती है।
चरवाहे से जुड़ी रोचक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक चरवाहे की गाय प्रतिदिन जंगल के एक स्थान पर जाकर स्वतः दूध बहा देती थी। जब गांव वालों ने वहां खुदाई कराई, तो जमीन के नीचे विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ। कई दिनों तक खुदाई के बाद भी उसका अंत नहीं मिला, जिसके बाद वहीं मंदिर का निर्माण कराया गया।
दो गांवों का विवाद और शिव का निर्णय
मंदिर दो गांवों की सीमा पर स्थित होने के कारण दोनों गांवों में अधिकार को लेकर विवाद हो गया। पंचायत के बाद यह तय हुआ कि निर्णय स्वयं महादेव करेंगे। अगले दिन जब मंदिर के कपाट खुले, तो शिवलिंग एक गांव की ओर झुका मिला, जिससे विवाद समाप्त हो गया।
स्कंद पुराण में उल्लेख
पुजारी के अनुसार मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है, जिससे इसकी प्राचीनता सिद्ध होती है। यहां स्थित कुंड में स्नान करने से त्वचा रोगों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। मुंडन, विवाह और विशेष पूजन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आते हैं।
आस्था का प्रमुख केंद्र
महाशिवरात्रि पर त्रिलोचन महादेव मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से यहां सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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