Bangladesh Election 2026: ऑब्जर्वर लिस्ट से भारत गायब, चीन-पाकिस्तान की मौजूदगी पर उठे सवाल

चीन-पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका

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ढाका।


बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।

चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ का एक विशेष मिशन भी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेगा। हालांकि, पड़ोसी और प्रमुख सहयोगी देश भारत को इस सूची में जगह नहीं मिली है।

यूनुस सरकार के बाद बदले रिश्ते?

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित यूनुस सरकार के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखा गया है। सीमा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग के बावजूद हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने रिश्तों में ठंडापन ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को ऑब्जर्वर सूची से बाहर रखना इसी बदले हुए समीकरण का संकेत हो सकता है।

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चीन-पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका

सूची में पाकिस्तान और चीन की मौजूदगी को केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है। चीन बांग्लादेश का बड़ा निवेशक है, जबकि पाकिस्तान की भागीदारी को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम ढाका की विदेश नीति में संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

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राजनीतिक तटस्थता दिखाने की कोशिश?

बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि पूर्व सरकार भारत के करीब थी। विपक्ष अक्सर “भारत-समर्थक” होने का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे माहौल में भारत को पर्यवेक्षक सूची से बाहर रखना सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया को “भारत-प्रभाव से मुक्त” दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।

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कूटनीतिक संकेत या संयोग?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला महज संयोग नहीं हो सकता। दक्षिण एशिया में हर कूटनीतिक कदम का एक संदेश होता है। भारत की अनुपस्थिति यह संकेत दे सकती है कि ढाका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र पहचान और संतुलित नीति को मजबूत करना चाहता है।

फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को सूची से बाहर रखने पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया आएगी या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों से ही यह तय होगा कि यह कदम रणनीतिक बदलाव है या केवल एक अस्थायी राजनीतिक फैसला।

लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश का यह चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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